मापन (Measurement)
भौतिक राशि (Physical quantity)- जिन राशियों की माप की जा सकती है, उन्हें भौतिक राशियाँ कहते हैं। जैसे- लंबाई, द्रव्यमान, बल आदि ।
मूल या आधारीय भौतिक राशि (Fundamental or basic physical quantity) जो भौतिक राशियाँ अन्य भौतिक राशियों पर निर्भर नहीं करती हैं, उन्हें मूल भौतिक राशियाँ कहते हैं। जैसे-लम्बाई, द्रव्यमान तथा समय ।
व्युत्पन्न भौतिक राशियाँ (Derived physical quantities)- जो भौतिक राशियाँ मूल भौतिक राशियों पर निर्भर करती हैं अर्थात् जिन राशियों को मूल भौतिक राशियों के पदों में व्यक्त किया जा सकता है, उन्हें व्युत्पन्न राशियाँ कहते हैं। जैसे क्षेत्रफल, आयतन, चाल आदि ।
मापन (Measurement) किसी अज्ञात भौतिक राशि की तुलना किसी मानक राशि से करके उस भौतिक राशि की माप ज्ञात करने की प्रक्रिया को मापन कहते हैं। किसी भी भौतिक राशि की माप को व्यक्त करने के लिए निम्नांकित दो पदों की आवश्यकता होती है:
(i) मापक मात्रक, जो मानक हो अर्थात् सर्वमान्य हो तथा
(ii) संख्यात्मक मान, जो यह बताता है कि अज्ञात राशि की माप में मानक मात्रक कितनी बार शामिल है। इस प्रकार किसी भौतिक राशि को निम्नांकित प्रकार से व्यक्त किया जाता हैं:
भौतिक राशि = n, जहाँ मापक का संख्यांक (number)
1 = मात्रक (unit) मात्रक (Units) किसी भौतिक राशि को मापने के लिए उसी के समान प्रकृति वाले चुने गए मानक को मात्रक कहते हैं।
मूल मात्रक (Fundamental or Basic units) मूल भौतिक राशियों के मात्रक को मूल मात्रक कहते हैं। जैसे-लम्बाई, द्रव्यमान तथा समय के मात्रक ।
व्युत्पन्न मात्रक (Derived units) - ऐसे मात्रक जो मूल मात्रकों पर निर्भर करते हैं अर्थात् जो मूल मात्रकों से उत्पन्न हुए हैं, उन्हें व्युत्पन्न मात्रक कहते हैं। जैसे-क्षेत्रफल, आयतन, बल आदि के मात्रक ।
विभिन पद्धतियों में मूल राशियों के मात्रक
दूरी मापने के कुछ प्रायोगिक मात्रक : बड़ी दूरियाँ; जैसे-खगोलीय पिंडों की दूरियाँ मापने के मात्रक :
a. ऐस्ट्रोनॉमिकल इकाई (Astronomical unit)- सूर्य और पृथ्वी के बीच की औसत दूरी को ऐस्ट्रोनोमिकल इकाई कहते हैं। 1 AU = 1.5×10¹¹ m
b. प्रकाश-वर्ष (Light year) - निर्वात् में प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की गई दूरी को प्रकाश-वर्ष कहते हैं।
1 प्रकाश-वर्ष (ly) = 9.46 × 10^15 m
c. पारसेक (Parsec or Parallactic second) - एक ऐस्ट्रोनोमिकल इकाई (1AU) लम्बाई वाला चाप जिस दूरी पर एक सेकेण्ड (1") का कोण अंतरित करता है, उस दूरी को एक पारसेक कहते हैं।
1 Parsec = 3.1 × 10^16 m
1. ऐंग्स्ट्रम (Angstrom, Å)- इसका उपयोग प्रायः तरंगों के तरंगदैर्ध्य को व्यक्त करने में होता है। यह एक मीटर का 10-10 वाँ भाग होता है। 1 A=10-10 m
2. माइक्रॉन (Micron, µ)- इसे माइक्रोमीटर भी कहते हैं। यह मीटर का 10 वाँ भाग होता है। 1 μ = 10 m
3. फर्मी (Fermi, f)- यह अत्यन्त छोटी लम्वाई मापने के लिए प्रयुक्त होता है। 1 f = 10-15 m
मापने में अनिश्चितता (Uncertainty in measurement)- किसी भी भौतिक राशि का बिल्कुल सही यथार्थ मापन असम्भव है। उनका एक निश्चित सीमा तक ही यथार्थ मापन किया जा सकता है, अतः किसी राशि की प्रेक्षित माप को व्यक्त करते समय उसके साथ अनिश्चितता का स्तर बताना आवश्यक होता है। अनिश्चितता से यह पता चलता है कि मापा गया मान किस सीमा के अन्दर है। यदि दर्शाए गए मान (Reported value) में अनिश्चितता का स्तर व्यक्त न हो, तो अनिश्चितता + 1' की मानी जाती है और यह व्यक्त मान (Reported value) में दशमलव के अंतिम अंक के साथ ली जाती है।
(i) यदि प्रेक्षित मान को 32.5 g व्यक्त दिया गया हो, तो इस मान में न्यूनतम अनिश्चितता दशमलव के अंतिम अंक (5) में '+1' की होगी, अर्थात् यह मान 32-6 g और 32-4 g के बीच होगा और उपर्युक्त माप को (32-5 + 0-1) g व्यक्त किया जा सकता है।
(ii) उसी प्रकार, यदि प्रेक्षित मान 32-623 g है, तो इसमें दशमलव के तीसरे अंक (3) में '+1' की अनिश्चितता होगी, अतः इस मान को 32-623 + 0-001 g व्यक्त किया जा सकता है।
- आधुनिक मापन-प्रणाली का प्रारम्भ 1875 ई० में हुआ था।
- भारत में मिट्रिक प्रणाली का प्रारम्भ 1956 ई० में हुआ था ।
- अंतर्राष्ट्रीय मीटर संधि पर 1875 में हस्ताक्षर हुआ था, जिसके अंतर्गत माप-तौल के अन्तर्राष्ट्रीय ब्यूरो (BIPM) की स्थापना पेरिस के निकट सेवर्स में हुई थी।
- प्रत्येक देश का अपना राष्ट्रीय माप-विज्ञान संस्थान (NMI) होता है, जो मापन के राष्ट्रीय मानक का अनुरक्षण (Maintain) करता है।
- भारत में राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, NPL (National Physical Laboratory) भारतीय राष्ट्रीय मानकों का अनुसरन करता है। यह नई दिल्ली में अवस्थित है।
1. निम्नलिखित राशियों के S.I. मात्रक को लम्बाई, द्रव्यमान तथा समय के आघारी मात्रक के पदों में व्यक्त करें :
(i) क्षेत्रफल
(ii) आयतन
(iii) घनत्व
(iv) चाल
(v) त्वरण
(vi) बल
(vii) दाब
(viii) संवेग
हल : (i) क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई
= लम्बाई × लम्बाई
= (लम्बाई)²
अतः, क्षेत्रफल का S.I. मात्रक = वर्गमीटर (m²)
(ii) आयतन = लम्बाई × चौड़ाई × ऊँचाई
= लम्बाई × लंबाई × लम्बाई
= (लम्बाई) ³
आयतन का S.I. मात्रक = घनमीटर (m³)
(iii) घनत्व = द्रव्यमान/आयतन
=द्रव्यमान/लम्बाई ³
घनत्व का मात्रक = किलोग्राम प्रति घनमीटर = kg/m³ दूरी
(iv) चाल = दूरी/समय
अतः चाल का मात्रक = मौटर प्रति सेकण्ड (m/s)
(v) त्वरण = वेग परिवर्तन / समय
त्वरण का मात्रक मीटर प्रति वर्गसेकेण्ड (m/s)
(vi) बल = द्रव्यमान × त्वरण
अतः, बल का मात्रक किलोग्राम मीटर प्रति वर्गसेकेण्ड =kgm/s²
(vii) दाब = बल/ क्षेत्रफल
दाब का मात्रक किलोग्राम प्रति मीटर प्रति वर्गसेकेण्ड = kg/m/s² या kgm²¹ s²
(viii) संवेग = द्रव्यमान × वेग
संवेग का मात्रक किलोग्राम मीटर प्रति सेकंण्ड = kg m/s या kg m s¹
2. किसी वस्तु की लम्बाई 22.7 मीटर मापी गई। इस मापन में अनिश्चितता का न्यूनतम प्रतिशत ज्ञात करें ।
हल : मापी गई लम्बाई = 22.7 cm
न्यूनतम अनिश्चितता = 0.1
अतः, न्यूनतम प्रतिशत अनिश्चितता= (0.1 /22.7) x100
= 0.44%.
3. किसी प्रयोग में समय की माप 24.9 ± 0.25 दी गई है। इस प्रयोग में समय के मापन में प्रतिशत अनिश्चितता की गणना करें।
हल: समय का पाया गया मान =24.9S
अनिश्चितता = 0.2s
प्रतिशत अनिश्चितता = (0.2/24.9)×100 = 0.8%
4. किसी वस्तु की लम्बाई 1.214 मीटर पायी गई। इस मापन में न्यूनतम अनिश्चितता क्या होगी ?
हल: मापी गई लम्बाई 1.214 मीटर
न्यूनतम अनिश्चितता दशमलव के तीसरे अंक में की होगी अर्थात् न्यूनतम अनिश्चितता = ± 0.001 मीटर
5. किसी वस्तु का द्रव्यमान 2.23 ± 0-02 ग्राम व्यक्त किया गया। बताएँ कि यह माप किम सीमा के अंदर है।
हल: यहाँ व्यक्त द्रव्यमान 2.23+0.02 ग्राम अतः मापा गया द्रव्यमान 2-23 ग्राम, अनिश्चितता = + 0-02 g ... द्रव्यमान का परास (2-23-0-02) से (2-23+0-02) अतः, यह द्रव्यमान 2.21 से 2.25 के बीच है।
6. मान लीजिए कि आपके परिवार को 50 ग्राम सोने के आभूषण खरीदने हैं। सोने के द्रव्यमान में प्रतिशत अनिश्चितता का स्तर क्या है ? यदि सोने का मूल्य 5 लाख रुपये प्रति किलोोग्राम है, तो इस अनिश्चितता को धन के रूप में व्यक्त कीजिए ।
हल : सौने का द्रव्यमान = 50 ग्राम अनिश्चितता = + 0-5 g [ अनिश्चितता प्रदर्शित नहीं है। .:. प्रतिशत अनिश्चितता = 5×100 50 =1 1kg सोने का मूल्य = 5 × 10° रुपये या, 1000 g सोने का मूल्य = 5 × 10' रुपये .. 0.5 ग्राम सोने का मूल्य = 5000×0.5 = 250 रुपये अतः, धन के रूप में अनिश्चितता = 250 रुपये । 7. यदि सेकेण्ड के मापन में अनिश्चितता 1×10" है, तो कितने वर्षों के पश्चात घड़ी में 1 सेकेण्ड का संशोधन करना होगा ? हल: श्रकण्ड के मापन में अनिश्चितता 1×10" अत;, 1 × 10-" सेकेण्ड की अनिश्चितता होती है। सेकेण्ड में