. यूरोप में राष्ट्रवाद-उदय और विकास

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यूरोप में राष्ट्रवाद-उदय और विकास

यूरोप में राष्ट्रवाद-उदय और विकास 

1. राष्ट्रवाद से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- राष्ट्रवाद एक ऐसी अवधारणा है जो अपने राष्ट्र के प्रति लगाव और सोच की भावना विकसित करता है।

 2.19वीं शताब्दी में यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास का क्या परिणाम हुआ?
 उत्तर - राष्ट्रवाद ने बहुराष्ट्रीय साम्राज्यों के स्थान पर राष्ट्रीय राज्यों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त कर दिया।
 3. निरंकुशवाद से आप क्या समझते हैं?
 उत्तर-ऐसी शासन व्यवस्था जिसपर कोई नियंत्रण नहीं रहता है।
 4. उदारवाद को परिभाषित करें। 
उत्तर- उदारवाद का मतलब है- व्यक्तिं की आजादी तथा कानून के समक्ष सबकी बराबरी। इस विचारधारा ने जहाँ एक ओर सभी तरह के विशेषाधिकारों को समाप्त करने की माँग की वहीं दूसरी ओर लोगों की राजनीतिक एवं नागरिक स्वतंत्रता पर बल दिया तथा मुक्त व्यापार की नीति का समर्थन किया।
 5. मेटरनिक युग से आप क्या समझते हैं? 
उत्तर- यूरोप में 1815-48 का युग मेटरनिक युग कहलाता है। इस अवधि में पुरातन व्यवस्था को बनाए रखने का प्रयास किया गया। 


            लघु उत्तरीय प्रश्न 

 1.  फ्रांसीसी क्रांति के मुख्य कारण क्या थे? 
 उत्तर - फ्रांसीसी क्रांति (1789) के मुख्य कारण राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक थे। लुई सोलहवाँ निरंकुश और अयोग्य था, समाज वर्ग-विभेद पर आधृत था तथा अर्थव्यवस्था दयनीय थी। इन परिस्थितियों को उजागर कर दार्शनिकों ने क्रांति को अवश्यंभावी बना दिया। 

2. नेपोलियन बोनापार्ट ने यूरोप में राष्ट्रवाद का प्रसार कैसे किया ? 
उत्तर - नेपोलियन ने विजित राज्यों में राष्ट्रवादी भावना जागृत कर दी। फ्रांसीसी आधिपत्यवाले राज्यों में नेपोलियन संहिता, फ्रांसीसी शासन और अर्थव्यवस्था लागू की गई। उसके कार्यों से इटली एवं जर्मनी के एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ। साथ ही, उसके युद्धों और विजयों से अनेक राष्ट्रों जिसने राष्ट्रवाद का विकास किया। में फ्रांसीसी आधिपत्य के विरुद्ध आक्रोश पनपा ।

3. 1848 की फ्रांसीसी क्रांति के कारणों का उल्लेख करें। 
उत्तर - लुई फिलिप का प्रधानमंत्री गिजो प्रतिक्रियावादी एवं सुधारों का विरोधी था। सुधारवादी दल के नेता थेयर्स ने 22 फरवरी 1848 को पेरिस में 'सुधार भोज' का आयोजन किया। राजा ने इसपर रोक लगा दी। अतः, पेरिस में विरोध प्रदर्शन हुए और जुलूस निकाले गए। इसपर पुलिस ने गोली चला दी जिसमें अनेक लोग मारे गए। कुद्ध | जनता ने लुई को गद्दी छोड़कर इंगलैंड भागने को विवश कर दिया।
 
4. इटली एवं जर्मनी के एकीकरण में ऑस्ट्रिया की क्या भूमिका थी? 
उत्तर- ऑस्ट्रिया इटली और जर्मनी के एकीकरण का विरोधी था।  इटली- वेनेशिया और लोम्बार्डी पर ऑस्ट्रिया का अधिकार था। सेडोवा के युद्ध (1866) में ऑस्ट्रिया की पराजय के बाद उसका प्रभाव इटली पर से समाप्त हो गया। जर्मनी जर्मनी ऑस्ट्रिया के अधीन शक्तिहीन संघ राज्य था। उत्तरी जर्मन महासंघ की स्थापना के बाद जर्मनी से ऑस्ट्रिया का प्रभाव समाप्त हो गया। 

5. 1830 और 1848 की क्रांतियों की सामान्य विशेषताएँ क्या थीं?
 उत्तर- 
(i) सभी क्रांतिकारी प्रतिक्रियावादी और निरंकुश शासन की समाप्ति चाहते थे।
 (ii) वे उदारवाद और राष्ट्रवाद के समर्थक थे।
 (iii) वे वैधानिक शासन की माँग कर रहे थे।
 (iv) इटली और जर्मनी में क्रांतिकारी एकीकृत राष्ट्र का निर्माण करना चाहते थे।
 (v) अन्य स्थानों में निरंकुशवाद से स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा मुख्य मुद्दा बन गया। 

6. इटली के एकीकरण में कावूर की भूमिका का उल्लेख करें। अथवा, कावूर का संक्षिप्त परिचय दें।
 उत्तर- कावूर को इटली के एकीकरण का 'राजनीतिज्ञ' कहा जाता है। 1850 में वह सार्डिनिया के राजा विक्टर इमैनुएल का मंत्री एवं 1852 में प्रधानमंत्री बना। उसने सैनिक और आर्थिक सुधारों द्वारा सार्डिनिया की स्थिति सुदृढ़ की। पेरिस शांति-सम्मेलन में उसने इटली के एकीकरण का प्रश्न उठाया। 1859 में ऑस्ट्रिया को पराजित कर कावूर ने लोम्बार्डी पर अधिकार कर लिया। 

7. गैरीवाल्डी कौन था? इटली के एकीकरण में उसकी क्या भूमिका थी? अथवा, गैरीबाल्डी के कार्यों की चर्चा करें। 
 उत्तर- इटली के एकीकरण का द्वितीय चरण गैरीबाल्डी की तलवार ने पूरा किया। वह युद्ध की नीति में विश्वास करता था। उसने सशस्त्र युवकों की एक टुकड़ी बनाई जो 'लाल कुर्ती' कहलाए। इनकी सहायता से उसने सिसली पर अधिकार कर वहाँ गणतंत्र की स्थापना की। वह पोप के राज्य पर भी आक्रमण करना चाहता था, परंतु कावूर ने इसकी अनुमति नहीं दी। 

8.इटली के एकीकरण में मेजिनी का क्या योगदान था ? उत्तर- मेजिनी को इटली के एकीकरण का 'पैगंबर' या 'मसीहा' कहा जाता है। राष्ट्रवादी भावना से प्रेरित होकर उसने कार्बोनारी की सदस्यता ग्रहण की। 1830-31 के विद्रोह में उसने सक्रिय भूमिका निभाई। गणतंत्रवादी उद्देश्यों का प्रचार करने के लिए उसने 'यंग इटली' (मार्सेई, 1831) तथा 'यंग यूरोप' (बर्न, 1834) का गठन किया। वह ऑस्ट्रिया के प्रभाव से इटली को मुक्त कराना चाहता था। अपने प्रयास में वह विफल रहा। 

9. विलियम प्रथम के बगैर जर्मनी का एकीकरण बिस्मार्क के लिए कैसे असंभव था ? 

उत्तर - विलियम प्रथम प्रशा के नेतृत्व में शक्ति के बल पर जर्मनी का एकीकरण करना चाहता था। बिस्मार्क का भी मानना था कि जर्मनी का एकीकरण 'रक्त और लौह' की नीति से ही संभव है। उसकी इस नीति को विलियम प्रथम से समर्थन और सहयोग मिला। अगर ऐसा नहीं होता तो बिस्मार्क के लिए जर्मनी का एकीकरण करना संभव नहीं था। 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

 यूरोप में राष्ट्रवाद-उदय और विकास

 1. राष्ट्रवाद के उदय के कारणों एवं प्रभाव की विवेचना कीजिए। 
 उत्तर - कारण - राष्ट्रवाद का उदय 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से माना जाता है। इसने यूरोप में निरंकुशवाद के विरुद्ध राष्ट्रीयता की भावना जागृत की। इसका प्रभाव अन्य यूरोपीय राष्ट्रों पर भी पड़ा। बाद में नेपोलियन ने अपनी विजयों एवं नीतियों से राष्ट्रवादी भावना को आगे बढ़ाया। नेपोलियन के आधिपत्य के विरुद्ध भी राष्ट्रवादी भावना का विकास हुआ। मेटरनिक की नीतियों ने भी राष्ट्रवादी भावना को बढ़ावा दिया। 1830-48 के मध्य अनेक यूरोपीय देशों में क्रांतियाँ हुईं जिसने राष्ट्रवाद का विकास किया। फलस्वरूप, यूनान का उदय, इटली एवं जर्मनी का एकीकरण हुआ। प्रभाव - 

(i) राष्ट्रवादी भावना से प्रेरित क्रांतियाँ और आंदोलन हुए तथा नए राष्ट्रों का उदय हुआ।
 (ii) उपनिवेशों में मुक्ति आंदोलन हुए।
 (iii) भारतीय राष्ट्रवादी भी इससे प्रभावित हुए। 
(iv) भारतीय धर्मसुधार आंदोलन के नेताओं पर भी राष्ट्रवादी भावना का प्रभाव पड़ा।
 (v) प्रतिक्रियावादी और निरंकुश शक्तियाँ कमजोर पड़ गई।
 (vi) राष्ट्रवादी प्रवृत्ति ने साम्राज्यवादी प्रवृत्ति और संकीर्ण राष्ट्रवाद को भी जन्म दिया। 
2. वियना काँग्रेस (सम्मेलन) का आयोजन क्यों किया गया? इसकी क्या उपलब्धियाँ थीं ? 
उत्तर - वियना काँग्रेस का उद्देश्य नेपोलियन द्वारा यूरोप की राजनीति में लाए गए परिवर्तनों को समाप्त करना, गणतंत्र एवं प्रजातंत्र की भावना का विरोध करना एवं पुरातन व्यवस्था की पुनर्स्थापना करना था। इसके द्वारा निम्नलिखित परिवर्तन किए गए।
 (i) फ्रांस को नेपोलियन द्वारा विजित क्षेत्रों को वापस लौटाने को कहा गया। 
(ii) प्रशा को उसकी पश्चिमी सीमा पर नए महत्त्वपूर्ण क्षेत्र दिए गए। 
(iii) इटली को अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त कर दिया गया।
 (iv) रूस को पोलैंड का एक भाग दिया गया। 
(v) ब्रिटेन को अनेक क्षेत्र दिए गए। 
(vi) जर्मन महासंघ पर ऑस्ट्रिया का प्रभाव स्थापित किया गया। 
(vii) नेपोलियन द्वारा पराजित राजवंशों की पुनर्स्थापना की गई।
(viii) वियना काँग्रेस ने यूरोपीय कन्सर्ट की भी स्थापना की। 
                 इस प्रकार, वियना काँग्रेस में प्रतिक्रियावादी शक्तियों की विजय हई, फ्रांसीसी क्रांति की उपलब्धियों को तिलांजलि दे दी गई। 
3. मेटरनिक व्यवस्था का परिचय दीजिए। उत्तर - मेटरनिक ऑस्ट्रिया का चांसलर था। 1815 का वियना सम्मेलन आयोजित करने में उसकी प्रमुख भूमिका थी। वह घोर प्रतिक्रियावादी एवं पुरातन व्यवस्था बनाए रखने का समर्थक था। 1848 तक वह यूरोपीय रजिनीति को नियंत्रित करता रहा। उसकी नीति थी - 'शासन करो और कोई परिवर्तन न होने दो।' उसके द्वारा यूरोप में स्थापित व्यवस्था 'मेटरनिक व्यवस्था' कहलाती है। उसने राष्ट्रवाद और संसदीय प्रणाली को रोकने एवं निरंकुश राजसत्ता को बनाए रखने का प्रयास किया। कार्ल्सबाद घोषणा द्वारा उदारवाद के प्रचार पर रोक लगा दी गई। इस प्रकार, प्रतिक्रियावादी शासन का दौर आरंभ हुआ। 1830 में यूरोप के अनेक भागों में क्रांतियाँ हुई। इन क्रांतियों ने मेटरनिक व्यवस्था और उसके 'वैधता के सिद्धांत' को गंभीर चुनौती दी। शीघ्र ही 1848 में ऑस्ट्रिया में हुई क्रांति के फलस्वरूप वह ऑस्ट्रिया छोड़कर लंदन चला गया। इसके साथ ही मेटरनिक व्यवस्था धराशायी हो गई। राष्ट्रवाद और उदारवाद की भावना बलवती हुई। 1830 की जुलाई क्रांति का विवरण दीजिए। 4. उत्तर - जुलाई 1830 में फ्रांस में पुनः स्वेच्छाचारी राजतंत्र के विरुद्ध क्रांति हुई। इसके निम्नलिखित कारण थे। 
(i) 1824 में चार्ल्स दशम फ्रांस का राजा बना। वह स्वेच्छाचारी और निरंकुश राजा था। उसके शासनकाल में नागरिक स्वतंत्रता का हनन हुआ, प्रेस और अभिव्यक्ति पर रोक लगा दी गई, उदारवादियों का दमन किया गया तथा चर्च और कुलीनों को विशेषाधिकार दिए गए। इससे उसका विरोध बढ़ने लगा। (ii) चार्ल्स के प्रधानमंत्री पोलिगनेक द्वारा पारित चार अध्यादेशों ने जलती अग्नि को और प्रज्वलित कर दिया। 26 जुलाई 1830 को पेरिस की जनता ने खुला विद्रोह कर दिया। राजा ने सेना के बल पर विद्रोह को कुचलने का प्रयास किया जिसमें वह विफल रहा। जनता ने पेरिस पर अधिकार कर लिया। परिणाम - (i) चार्ल्स गद्दी त्यागकर इंगलैंड चला गया। फ्रांस में बूर्बो वंश के स्थान पर आर्लेयंस वंश के लुई फिलिप को गद्दी सौंपी गई। ।
(ii) संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना हुई। 
(iii) उदारवाद और राष्ट्रवाद की विजय हुई। 

5. यूनानी स्वतंत्रता आंदोलन का संक्षिप्त विवरण दीजिए। 
उत्तर- 18वीं सदी में ऑटोमन साम्राज्य के अंतर्गत तुर्की की स्थिति कमजोर पड़ गई।  इसका लाभ उठाकर राष्ट्रवादी शक्तियाँ सशक्त हो गई। इन्हें यूनान के बौद्धिक आंदोलन तथा गुप्त क्रांतिकारी संगठनों का साथ मिला। परिणामस्वरूप, 1821 में मोलडेविया में व्यापक विद्रोह हुआ जिसे कुचल दिया गया। मोरिया में दूसरा विद्रोह हुआ। तुर्की के सुलतान ने इस विद्रोह को धार्मिक स्वरूप देने का प्रयास किया। मिस्र के शासक पाशा महमत अली की सहायता से उसने क्रूरतापूर्वक विद्रोह का दमन किया। इससे पूरा यूरोप स्तब्ध हो गया। तुर्की के विरुद्ध ब्रिटेन, रूस और फ्रांस संयुक्त कार्रवाई के लिए तैयार हुए। रूस द्वारा पराजित होकर 1829 में तुर्की ने उसके साथ एड्रियानोपुल की संधि की। यूनानी राष्ट्रवादियों ने इस संधि को स्वीकार नहीं किया। फलतः, 1832 में कुस्तुनतुनिया की संधि द्वारा स्वतंत्र यूनान का उदय हुआ। बवेरिया का राजकुमार ऑटो यूनान का शासक बना। उल्लेख करें।

 6. इटली के एकीकरण में मेजिनी, कावूर और गैरीवाल्डी के योगदानों को लिखे।
उत्तर- इटली का एकीकरण मेजिनी, कावूर और गैरीबाल्डी के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप हुआ। मेजिनी - मेजिनी तरुणावस्था से ही गुप्त राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेता था। वह कार्बोनारी का सदस्य बन गया। 1831 में उसने 'यंग इटली' और 1834 में 'यंग यूरोप' नामक गुप्त क्रांतिकारी संगठन स्थापित किए। मेटरनिक के पतन (1848) के बाद वह इटली के एकीकरण के प्रयास में लग गया, परंतु विफल होकर वह इटली से चला गया। कावूर - राजा विक्टर इमैनुएल के मंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उसने सार्डिनिया की आर्थिक और सैनिक स्थिति सुदृढ़ की। 1859 में फ्रांस की सहायता से ऑस्ट्रिया को पराजित कर कावूर ने लोम्बार्डी पर अधिकार कर लिया। मध्य इटली स्थित अनेक राज्यों को सार्डिनिया में मिला लिया गया। कावूर के प्रयासों से इटली के एकीकरण का महत्त्वपूर्ण चरण पूरा हुआ। गैरीवाल्डी- अपनी 'लाल कुर्ती' और स्थानीय किसानों की सहायता से उसने 1860 में सिसली पर अधिकार कर लिया। बाद में उसने नेपल्स पर भी अधिकार कर लिया। इन्हें सार्डिनिया में मिला लिया गया। इस प्रकार, इटली के एकीकरण का द्वितीय चरण पूरा हुआ।