उत्तर- जैव उद्विकास सिद्धान्त का जनक फ्रांसीसी वैज्ञानिक लोमार्कवाद को माना जाता है। 1809 ई. में प्रकाशित अपने शोधाग्रंथ फिलॉस्फीक जूलोजिक में उन्होंने जैव उद्विकास सिद्धान्त प्रतिपादित करते हुए बताया कि सभी जीवों व उनके अंगों में विद्यमान आंतरिक बल के कारण उनमें सदैव वृद्धि होती है। शरीर में नये अंगों का विकास अनुभव होने वाली नई आवश्यकताओं एवं नई दिशा में किये गये प्रयासों के फलस्वरूप होता है। जीवों एवं पेड़-पौधों पर वातावरण, मृदा, ताप एवं भोजन में हुए परिवर्तनों का प्रभाव पड़ता है। किसी अंग का नियमित उपयोग किये जाने पर वह अधिक विकसित हो जाता है और यदि किसी अंग का उपयोग न किया जाये तो वह धीरे-धीरे अपघटित हो जाता है।
प्रश्न 2. प्रागैतिहास, आद्य इतिहास और इतिहास को परिभाषित कीजिए।
उत्तर- प्रागैतिहास- वह इतिहास जिसके लिखित साक्ष्यों का अभाव है, प्रागैतिहास के तहत आता है। आद्य इतिहास - वह इतिहास जिसमें लिपि के साक्ष्य तो मिलते हैं, किन्तु उनके अपठ्य होने के कारण कोई निष्कर्ष नहीं निकलता, आद्य इतिहास कहलाता है। इतिहास वह इतिहास जहाँ से हमें लिखित साक्ष्य मिलने लगते हैं, इतिहास के तहत आता है। प्रश्न 3. हादजा जनसमूह की जीवन-शैली का संक्षिप्त परिचय दीजिए। उत्तर- हादजा लोग अपने भोजन के लिए मुख्य रूप से जंगली साग-सब्जियों पर ही निर्भर रहते हैं। वे माँस का भी प्रयोग करते हैं। ये लोग हाथी को छोड़ कर बाकी सभी प्रकार के जानवरों का शिकार करते हैं तथा उनका माँस खाते हैं। ये लोग अपने शिविर वृक्षों तथा चट्टानों के बीच, विशेषकर वहाँ लगाते हैं जहाँ ये दोनों सुविधाएँ प्राप्त हो। ये लोग जमीन तथा उसके संसाधनों पर अपना अधिकार नहीं जमाते सूखे के समय भी इन लोगों के यहाँ भोजन की कमी नहीं होती क्योंकि उनके प्रदेश में सूखे के मौसम में भी वनस्पति-खाद्य- कंदमूल, बेर, बाओबाब पेड़ के फल आदि प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।
प्रश्न 4. "मानव का विकास क्रामिक रूप से हुआ।" स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- वैज्ञानिकों के अनुसार मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ। इस बात का प्रमाण हमें मानव की उन प्रजातियों के जीवाश्मों से मिलता है जो अब लुप्त हो चुकी हैं। उनके शारीरिक लक्षणों के आधार पर मानव को भिन्न-भिन्न प्रजातियों में बाँटा गया है। जीवाश्मों का काल-निर्धारण प्रत्यक्ष रसायनिक विश्लेषण द्वारा अथवा उन परतों का परोक्ष रूप से काल-निर्धारण करके किया जाता में वे दबे हुए पाए जाते हैं। चार्ल्स डार्विन ने अपनी पुस्तक 'ऑन दि ओरिजिन ऑफ स्पीशीज' में यह बताया है कि मानव का विकास बहुत समय पहले जानवरों से क्रमिक रूप में हुआ।
प्रश्न 5: प्राइमेट्स के बारे में आप क्या जानते हैं? इनकी प्रमुख विशेषताएं बताइए ।
उत्तर- लगभग 360 लाख वर्ष पूर्व एशिया तथा अफ्रीका में स्तनपायी प्राणियों की 'प्राइवेट' नामक श्रेणी का उद्भव हुआ। 'प्राइमेट' स्तनपायी प्राणियों के एक बहुत बड़े समूह के अन्तर्गत एक उप-समूह है। इस प्राइमेट उप-समूह में वानर, लंगूर तथा मानव सम्मिलित हैं। प्राइमेट्स की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(i) इनके शरीर पर बाल होते हैं।
(ii) पैदा होने वाला बच्चा अपेक्षाकृत लम्बे समय तक माता के गर्भ में पुलता है।
(iii) माताओं में बच्चों को दूध पिलाने के लिए ग्रन्थियाँ होती हैं।
(iv) प्राइमेट्स के दाँत भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं।
(v) इनमें अपने शरीर का तापमान स्थिर रखने वाली क्षमता होती है।