. वैज्ञानिक आविष्कार का सामाजिक सदुपयोग

Recents in Beach

वैज्ञानिक आविष्कार का सामाजिक सदुपयोग

आविष्कार का सामाजिक सदुपयोग
  आज विज्ञान के महत्त्व को उसकी उपादेयता को नकारा नहीं जा सकता है। चाहे वह घर का रसोई घर हो या समर भूमि, विज्ञान के चमत्कार तथा प्रभाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं। प्रकृति पर विज्ञान की विजय – यह एक किवदन्ती नहीं, एक प्रत्यक्ष सत्य है। चन्द्रमा पर मनुष्य का अभियान, ट्यूब बेबी, किट. अणुबम आदि विज्ञान के उत्कृष्ट वरदान हैं। सैकड़ों हजारों वर्ष पूर्व मनुष्य लम्बी दूरियाँ भी नहीं तय करता था। आज वायुयान के सहारे हम कुछ घंटे में भारत से अमेरिका पहुँच जाते है। कभी चन्द्रमा यात्रा की बात कोरी कल्पना समझी जाती थी, परन्तु जब मानव चन्द्रमा की सतह पर उतरे तो सम्पूर्ण विश्व दांतों तले ऊंगलियाँ दबाकर रह गया। आज जीवन का कोई भी पक्ष ऐसा नहीं है जहाँ विज्ञान की किरणे न पहुँची हो। विज्ञान हमारे लिए वरदान सिद्ध हुआ है। इसकी उपयोगिता जीवन के हर क्षेत्र में सिद्ध है। क्षण-क्षण पल-पल इस विज्ञान के चमत्कारों का नजारा हम देखते हैं। कुछ महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों का संकेत करके हम उसके महत्त्व और उपादेयता का सहज अनुभव कर सकते हैं। विज्ञान के अद्भुत आविष्कारों ने एक नई क्रान्ति पैदा कर दी है, मानव संस्कृति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। आवागमन के क्षेत्र में विज्ञान की उपलब्धियों विशिष्ट एवं विलक्षण है। आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व एक जगह से दूसरी जगह जाना गहन समस्या थी। पर आज वैज्ञानिक आविष्कारों ने इसमें क्रान्तिकारी परिवर्तन किया है। रेलगाड़ियाँ, मोटर कार, बसें, वायुयान आदि इतनी तेज सवारियाँ निकल गई है कि बाती हों. बातों में हम लम्बी-लम्बी दूरियाँ तय कर लेते हैं। तार, टेलीफोन, वायरलेस आदि यंत्रों के आविष्कार के कारण हम घर बैठे दिल्ली, बम्बई, अमेरिका, लंदन में रहने वाले लोगों से बातें कर लेते है। नदी, समुद्र, पहाड़ आज हमारे आवागमन के मार्ग में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न नहीं कर सकते। चिकित्सा के क्षेत्रों में विज्ञान की उपलब्धियों ने संजीवनी बूटी का काम किया है। पुराने जमाने में। छोटी-मोटी बीमारियों के कारण लोगों की मृत्यु हो जाती थी। परन्तु आज शायद ऐसा हो कोई असाध्य रोग हो जिसको दवा सुलभ नहीं है, जिसका निदान संभव नहीं है। क्या यह विलक्षण चमत्कार नहीं है कि वि से चेचक, प्लेग, मलेरिया आदि रोगों का आज उन्मूलन हो गया है। आज बड़े असाध्य रोगों की भी अच्छी और प्रभावकारों औषधियाँ निकल गई हैं। दिन-प्रतिदिन नये-नये प्रयोग हो रहे है, नये-नये उपकरण एवं नई- नई जीवन रक्षक औषधियाँ निकल रही है। मनुष्य का हृदय विकृत या क्षतिग्रस्त हो जाने पर उसे बदल दिया जा सकता है और मनुष्य को नई जिन्दगी दी जा सकती है। अंधे को आँखों की रोशनी, विकलांगों के विकृत अंगों में सुधार, दिल और दिमाग में परिवर्तन वैज्ञानिक चमत्कारों की ही देन है। आवागमन या चिकित्सा ही नहीं, प्रायः सभी क्षेत्रों में विज्ञान की बड़ी-बड़ी उपलब्धियाँ सामने आयो है। चन्द्रमा और मंगल पर मानव की विजय से लेकर पाकशालाओं और शयनकक्षों में आराम एव सुख- सुविधाओं को सारी चीजों की व्यवस्था विज्ञान के हो चमत्कार हैं। रेडियो, सिनेमा, टेलीविजन, विडियो आदि सारी की सारी चीजें विज्ञान की ही देन है। कम्प्यूटर ने तो एक नये युग की शुरुआत की है। विज्ञान ने इतने अधिक प्रकार के आविष्कार कर दिये है कि उनसे मानव जीवन के सभी क्षेत्र पूर्णतया प्रभावित हो गये हैं। उनमें तो कितने हमारे जीवन में इतने घुल-मिल गये है कि अब उनके अभाव में जीवन मात्र की कल्पना करना भी कठिन है। लेकिन आज विज्ञान ने आतंक को इतनी व्यापकता दे दी है कि विश्व- विनाश का भय उत्पन्न हो गया है तथा इनके प्रतिकार के लिए विश्व शान्ति के प्रयत्न शुरू हो गये है। अरबों है की लागत और वर्षों के परिश्रम का फल आज नष्ट होने जा रहा है या विश्व को नष्ट करने के लिए तत्पर है। विज्ञान ने आज विभिन्न देशों के लोगों को इतना सन्निकट कर दिया है कि हर देश की समस्या विश्व स्तर पर सोची जा रही है। विज्ञान ने जहाँ सुख-सुविधाओं को बढ़ाया है, वहाँ खतरे को भी बढ़ाया है। अत: विज्ञान से ही विश्व की समस्या उत्पन्न हुई है और वही विज्ञान विश्व शान्ति में भी सहायक होगा। आज आवश्यकता है वैज्ञानिक आविष्कारों का कृषि, यातायात, सूचना, औद्योगिक विकास आदि के क्षेत्रों में सार्थक प्रयोग करने की न कि विश्व विनाशकारी अस्त्र-शस्त्रों के निर्माण में विज्ञान की सार्थकता सामाजिक सभ्यता का निदान करने में है जिससे मानव जीवन सुखमय बन सके और यही वैज्ञानिकः आविष्कार का सही सामाजिक सदुपयोग होगा।