. महात्मा गांधी

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महात्मा गांधी

महात्मा गांधी 
   यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युधानमर्धस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।। हमारे देश की यह परम्परा रही है कि जब पाप, अन्याय, अत्याचार, शोषण, उत्पीडन आदि कुरीतियों बढ़ जाती है, मानवी प्रवृत्ति पर दानवी प्रवृति हावी हो जाती है, तब देश की इन कुरीतियों के निवारण के लिए महापुरुषों का अवतरण होता है। रावण के अत्याचार एवं दर्प को चूर्ण करने के लिए स्वयं श्रीराम अवतरित हुए, कंस के दर्प-दलन के लिए श्रीकृष्ण ने जन्म लिया और अंग्रेजों के नाश और भारतीयों की रक्षा के लिए महात्मा गाँधी ने जन्म लिया। हमारा देश सदियों से परतंत्रता की बेड़ी में जकड़ा हुआ कराह रहा था। अंग्रेजों के शोषण और उत्पीड़न से देश की जनता छटपटा रही थी। राष्ट्रीय एकता की भावना बिखर चुकी थी। सभी अपने-अपने जान-माल की सुरक्षा को चिन्ता में व्यग्र थे। ऐसी ही विकट परिस्थिति में महात्मा गाँधी का अवतरण हुआ। गुजरात राज्य के पोरबन्दर नामक स्थान में 2 अक्टूबर, 1869 ई० में महात्मा गाँधी का जन्म हुआ। इनका बचपन का नाम मोहनदास करमचन्द गांधी था। पिता का नाम करमचन्द गाँधी और माता का नाम पुतली बाई था। गाँधी जी कुशाग्रबुद्धि के छात्र नहीं थे। फिर भी भारत में शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात बैरिस्ट्री की शिक्षा प्राप्त करने के लिए वे इंगलैंड गये। इंग्लैंड से वापस आने पर इन्होंने कुछ दिनों तक बैरिस्ट्री भी की, मगर देश की बिगड़ती दशा देखकर इनका हृदय कराह उठा और उन्होंने 1917 ई० में भारतीय निबंध 23 राजनीति में प्रवेश किया। बिहार राज्य के चम्पारण में नीलहे अंग्रेजों का अत्याचार चरम सीमा पर पहुँच गया था। जनता अंग्रेजों की दमनात्मक नीति से कराह रही थी। वहाँ गाँधीजी ने सत्याग्रह आन्दोलन को एक नई दिशा दी. एक नया कार्यक्रम दिया। यहीं से इनका राजनीतिक जीवन का प्रारंभ हुआ और अन्ततः अपने लक्ष्य पर पहुँच कर हो इन्होंने दम लिया। राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के क्रम में ये कई बार जेल गये। तरह-तरह की यातनाएं सही परन्तु इनका विश्वास शान्तिपूर्ण क्रांति में था, सत्याग्रह में था। ये अहिंसात्मक आन्दोलन के जन्मदाता थे। आन्दोलन को इस नई पद्धति से सम्पूर्ण देश में राष्ट्रीयता की भावना उमड़ पड़ी। अतः भारत की स्वतंत्रता और नये भारत के निर्माण का सबसे बड़ा श्रेय महात्मा गाँधी को मिला। महात्मा गाँधी गुणों के आगर थे। उनका जीवन सरल, अकृत्रिम और उन्मुक्त था। जिसे हम कृत्रिमता, बनावटीपन या शहरीपन कहते हैं, उसको तो गाँधी जी के ऊपर छाया तक भी नहीं पड़ी थी। सादा जीवन और उच्च विचार के आप साक्षात् मूर्ति थे। सादगी से आपको हार्दिक प्रेम था। सात्विक भोजन करते थे और नवनिर्मित निर्मल खादी वस्त्र धारण करते थे। हृदय मक्खन की तरह मुलायम और सरल था। तभी तो विश्व इन्हें एक मसीहा के रूप में जाना, पहचाना। इन्हें 'Half Nacket Faki'r' को उपाधि अंग्रेजो ने दो थी। इनका सारा जीवन सत्य और अहिंसा के रंग में रंगा हुआ रहा। तन और मन से दीन-दुखियों और हरिजनों के कल्याण के लिए आजीवन प्रयत्नशील रहे। ये सच्चे अर्थों में देवता स्वरूप और भारतीय आदर्शों के अवतार थे। इन्होंने देशवासियों को स्वावलम्बन का पाठ पढ़ाया। महात्मा गाँधी ने रामराज्य को कल्पना की थी लेकिन अपने उच्च आदर्श को प्राप्ति के पूर्व हो 30 जनवरी, 1948 को एक सिरफिरे हत्यारे ने उनकी हत्या कर दी। आज हम भारतीयों का यह पुनीत कर्त्तव्य बनता है कि उनके आदर्शभूत भारत का निर्माण करे और यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।