. बिहार और खनिज संपदा

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बिहार और खनिज संपदा

बिहार और खनिज संपदा 
 यह पृथ्वी रत्नगर्भा है। पृथ्वी की कोख में कहाँ क्या है, यह आज खोज का विषय है। नए-नए वैज्ञानिक अनुसन्धानों के द्वारा आज संभव हो सका है, हम पृथ्वी के अन्दर विद्यमान बहुमूल्य पदार्थों की खोज करने में सक्षम हो चुके हैं। यह पृथ्वी कहीं सम है तो कहीं विषम, कहीं समुद्र है तो कहीं रेगिस्तान, कहीं घने बन है तो कही पठार और नदियाँ, कहीं की भूमि अत्यन्त उपजाऊ है तो कहीं की बंजर। ये सारी समानताएँ और विषमताएँ बिहार की भूमि के साथ भी पायी जाती है। इसका उतरो भाग समतल और उपजाऊ है तो दक्षिणी भाग पहाड़ और पठार से युक्त जहाँ पृथ्वों को कोख में बहुमूल्य खनिज पदार्थ छिपे हैं। मिट्टी से फसल और फल तथा वनों से लकड़ियाँ और लाभदायक बहुत सारी चीजें मिलती है। इस प्रकार चट्टानों की तहो में छिपी हुई भी कई प्रकार की अनमोल चौजें मिलती है। ये चीजें भूमि को खोदकर निकाली जाती हैं, इन्हें खनिज पदार्थ कहते हैं। कोयला, लोहा आदि खनिज पदार्थ है। सोना और चाँदी जिसके आभूषण बनते हैं या ताँबा और ऐलुमिनियम जिसके बरतन हम काम में लाते हैं, खनिज पदार्थों से ही बनते हैं। हमारे अनेक कारखाने खनिजों पर निर्भर है। खनिज हमारे लिए बहुत आवश्यक है। हमारा बिहार खनिज में काफी धनी है। कोयला, लोहा, अभ्रक, ताँबा, बाक्साइट और यूरेनियम यहाँ भारी मात्रा में पाये जाते हैं। यह सभी राज्य के पठारी भागों में मिलते हैं। संसार में सबसे अधिक अभ्रक कोडरमा के पहाड़ी भाग में मिलता है। हजारीबाग, गया और मुंगेर में भी यह मिलता है। पत्थरों को तोड़ कर उनके बीच से अभ्रक के बड़े-बड़े टुकड़े निकाले जाते हैं। शीशे के तरह इसके आकार देखे जा सकते हैं। यहाँ से अभ्रक संसार के अनेक देशों में भेजा जाता है। बिहार का कोयला भी उत्तम किस्म का है। इसका उपयोग चूल्हे, कारखाने, विद्युत उत्पादन, खाद, रंग, नाइलन कपडा आदि में होता है। इसी प्रकार लोहा जो हमारे बड़े काम की बीज है जिससे सूई और काँटी जैसी छोटी-छोटी चीजों से लेकर रेलगाड़ियों बड़े-बड़े जहाज आदि बनाये जाते हैं, इसका बड़ा ही विशाल भंडार हमारे राज्य में विद्यमान है। इन खनिजों के अतिरिक्त मैंगनीज, चूना-पत्थर, चीनी मिट्टी और यूरेनियम भी मिलते हैं। इस तरह हम देखते हैं कि बिहार खनिज सम्पदाओं से परिपूर्ण है, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि खनिज के क्षेत्र में परिपूर्ण होते हुए भी आज बिहार देश का सबसे पिछड़ा और गरीब राज्य है। देश में सर्वाधिक बिहार में है। बिहार के मजदुर दिल्ली मुंबई और पंजाब जाकर रोजी-रोटी कमाते हैं। इसके लिए राज्य सरकार और केंद्रीय सरकार ही दोषी हैं। जब तक बिहार में उपलब्ध खनिज संपदा ओं का उचित प्रयोग राज्य में नहीं होगा तब तक यहां से गरीबी और बेरोजगारी समाप्त नहीं की जा सकती हैं। साथी इसके लिए यहां के नागरिकों को भी इसके प्रति जागरूक होना होगा। जब तक इन खनिजों का राज्य में समुचित उपयोग ना हो यहां से बाहर अन्य राज्यों और  विदेशों में निर्यात पर रोक लगाना होगा। नए-नए कल कारखानों की स्थापना राज्य में इसके लिए हर बिहार वासियों का पुनीत कर्तव्य बनता है कि वह इस दिशा में पहल करें। राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर इसके लिए दबाव डाला जाए और राज्य के ऊपर लगे निर्धनता रूपी कलंक का टीका को हम सब मिलकर समाप्त करें। अजय में खुशहाली हो इसके लिए प्रयास करें।