. पुस की रात

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पुस की रात




बिहार विद्यालय परीक्षा समिति 11वीं कक्षा के हिंदी के पाठ और उसके लेखक, हिंदी का सलूशन, कक्षा के हिंदी का सलूशन, दिगंत भाग-1 के पाठ और लेखक का नाम

1.प्रेमचंद की तुलना विश्व के किस महान रचनाकार से की जाती है ?
 (क) टॉल्सराय
 (ख) गोर्की 
(ग) शेक्सपीयर  
(घ) मिल्टन
उत्तर- (ख)
2. प्रेमचंद की कहानियों की पृष्ठभूमि क्या है ? 
(क) शहरी परिवेश  
(ग) रोमानी परिवेश
 (ख) ग्रामीण परिवेश 
(घ) काल्पनिक परिवेश
उत्तर- (ख)
 3. निम्नलिखित पत्रिकाओं में से किस पत्रिका का संपादन प्रेमचंद जी ने किया था ? 
 (क) हंस 
(ख) धर्मयुग
(ग) सारिका 
 (घ) साप्ताहिक हिन्दुस्तान उत्तर- (क)
4. प्रेमचंद जी द्वारा लिखित 'मानसरोवर' रचना कितने खंडों में प्रकाशित है ? 
(क) दस खंड 
(ग) छः खंड 
(ख) आठ खंड 
(घ) नव खंड 
उत्तर- (ख) 
5. प्रेमचंद की किस रचना की तुलना 'रामायण' से की जाती है ?
 (क) गोदान 
(ग) कर्मभूमि
 (ख) रंगभूमि
 (घ) सेवासदन
 उत्तर- (क)
 6. प्रेमचंद किस युग के रचनाकार हैं ? 
(क) आदि काल 
(ख) भारतेंदु काल
 (ग) द्विवेदी काल
 (घ) छायावादी काल तथा रीतिकाल 
उत्तर- (क)
 7. प्रेमचंद जी मूलतः किसके प्रतिनिधि लेखक हैं ? 
(क) किसान-संस्कृति, 
(ख) वाणिज्य-संस्कृति 
(ग) श्रृंगारिक 
(घ) खेल-संस्कृति 
उत्तर- (क) 
 8. सहना कौन था ? 
(क) किसान
 (ग) महाजन
 (ख) मजदूर 
(घ) जमींदार के
9. हल्कू की पत्नी मुन्नी कंबल खरीदने  लिए कितने रुपये इकड्डा की थी ? 
(क) दस रुपये 
(ग) सात रुपये 
(ख) पाँच रुपये 
(घ) तीन रुपये 
उत्तर- (घ) 
10. प्रेमचंद की कहानियाँ किस भावना से प्रेरित है ? (क) नवक्रांति की भावना से
(ख) धार्मिक भावना से 
(ग) समाज-सुधार की भावना से
 (घ) नारी कल्याण की भावना से
उत्तर- (ग)
11. खेतों में फसल की रक्षा में हल्कू का संगी कौन था ? नारी कल्याण की भावना से 
 (क) उसका बड़ा लड़का 
(ग) उसकी पत्नी मुन्नी
 (ख) उसका कुत्ता जबरा 
(घ) उसका एक पड़ोसी 
उत्तर- (ख)
 12. हल्कू ने अपनी पत्नी से किस स्वर में रुपये की मांग की ?
 (क) खुशामद के स्वर में
 (ख) क्रोध के स्वर में
 (ग) धमकी के स्वर में 
(घ) प्रतिशोध के स्वर में 
उत्तर- (ग) 
13. हल्कू किससे आहत था ? 
(क) अपनी दीनता से
 (ख) पत्नी के व्यवहार से 
(ग) जबरे कुत्ते की अनोखी मैत्री से 
(घ) खेत मालिकों के व्यवहार से 
उत्तर- (घ) 
14. हल्कू ने पूस की रात की ठंडी का सामना किससे किया ? 
(क) पत्तियों की आग से 
(ग) पुआल की गर्मी से 
(ख) मोटे कपड़ों से
 (घ) मचान की ओट से 
उत्तर- (क)


रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
 1. हल्कू ने आकर स्त्री से कहा ...............लाओ जो रुपये रखे हैं, उसे दे दो किसी तरह का दोगला छूटे
उत्तर- सहना आया है, 
2. पेट के लिए मजूरी करो ऐसी खेती से बाज आए। मैं...........न दूँगी न दूँगी ।
उत्तर -रुपए
3. हल्कू उदास होकर बोला- तो क्या .........खाऊँ । 
उत्तर- गाली ।
4. मुन्नी ने तड़पकर कहा- गाली क्यों देगा, क्या.........है
 उत्तर- उसका राज ।
 5. खाट के नीचे उसका संगी जबरा पेट में मुँह डाले सर्दी से ............... कर रहा था। 
उत्तर - कू-कू
 6. यह................ न जाने कहाँ से बरफ लिए आ रही है ? 
उत्तर- रांड पहुआ। 
7. तकदीर की खूबी है मजूरी हम करें,............ लूटें ।  उत्तर- मजा दूसरे । 
8. जबरा ने उसके मुँह की ओर प्रेम से..........हुई आँखों से देखा ।
 उत्तर- छलकती । 
9. इस अनोखी मैत्री ने जैसे........... के सब द्वार खोल दिए थे और उसका एक-एक अणु प्रकाश से चमक रहा था। 
उत्तर- उसकी आत्मा ।
 10. कर्त्तव्य उसके हृदय में........... की भाँति उछल रहा था। 
उत्तर-अरमान। 
11. सप्तर्षि अभी आकाश में भी ............।
उत्तर- नहीं चढे । 
12. हल्कू ने कहा- अब तो नहीं रहा जाता जबरन ! चलो बगीचे में ................बटोरकर तायें। 
उत्तर- पत्तियाँ। 
13. हल्कू ने फिर चादर ओढ़ ली और गर्म राख के पास बैठा हुआ एक .................लगा ।
उत्तर- गीत गुनगुनाने। 
14. नीलगायें खेत का ...................किए डालती थीं। 
उत्तर- सफाया । 
15. अकर्मण्यता ने रस्सियों की भाँति उसे चारो तरफ से............... रखा था।
 उत्तर- जकड़ सो गया। 
16. उसी राख के पास गर्म जमीन पर वह ......... सो गया।
उत्तर- चादर ओढ़कर। 
 17. उसने दिल में कहा-नहीं जबरा के होते कोई जानवर..............नहीं आ सकता । 
उत्तर- खेत में
 18. उसने जोर से आवाज लगाई............
उत्तर-लिहो-लिहो ! 
19. कैसी अच्छी खेती थी; पर ये दुष्ट जानवर उसका.........किए डालते हैं। 
 उत्तर- सर्वनाश। 
20. सबेरे जब उसकी नींद खुली, तब चारो तरफ ............गई थी। 
उत्तर-धूप फैल। 
 21. मुन्नी बोली- हाँ, सारे खेत का ..........हो गया।
उत्तर- सत्यानाश ।  
22. हल्कू ने बहाना किया- मैं ...........बचा, तुझे अपने खेत की पड़ी है।
 उत्तर-मरते-मरते । 
23. दोनों फिर ...….....पर आए ।
 उत्तर- खेत की डाँड़ ।
24. मानो ..............हीन हो ।
  उत्तर- प्राण।
 25. दोनों खेती की .............देख रहे थे। 
उत्तर- दशा।
 26. मुन्नी के मुख पर ..........छाई थी। 
उत्तर-उदासी। 
27. मुन्नी ने चिंतित होकर कहा अब मजूरी करके .............भरनी पड़ेगी ।
उत्तर - मालगुजारी।
 28. हल्कू ने प्रसन्न मुख से कहा .............यहाँ सोना तो न पड़ेगा।
 उत्तर-रात की ठंढ में। 
29. एकाएक एक झोंका मेंहदी के......... लिए हुआ आया। 
उत्तर-फूलों की खुशबू।। 
30. हल्कू ने कहा- कैसी अच्छी............ आई जबरू ! 
उत्तर-महक।
31. बगीचे में धुप जाता था। अँधेरा हुआ था। और अंधकार में निर्दय पवन पत्तियों को ...............चला जाता था।
उत्तर-कुचलता हुआ। 
 32. हल्कू एक ..........खरीदने के लिए तीन रुपये बचाकर रखना चाहता है।
 उत्तर-कंबल ।
33. प्रेमचंद को आदर्शोन्मुखी ..... ......... वादी कथाकार कहा जाता है। 
उत्तर- यथार्थ । 
34. 'पूस की रात' एक........... वादी कहानी है।
उत्तर- यथार्थ । 
 अति लघुउत्तरीय प्रश्न 
• निम्न प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दें-
 1. 'पूस की रात' किनकी रचना है ? 
उत्तर- प्रेमचंद 
2. हल्कू के कुत्ते का क्या नाम था ? 
उत्तर-जबरा ।
 3. नीलगायें खेत में किस समय प्रवेश की ?
 उत्तर-पूस की ठंड भरी अंधेरी रात में नीलगायें खेत में प्रवेश की।
 4. मुन्नी के चेहरे पर उदासी क्यों छायी ? 
उत्तर- नीलगायों द्वारा खेत की बरबादी पर मुन्नी के चेहरे पर उदासी छा गयी।
 5. 'पूस की रात' की कहानी का मुख्य पात्र कौन है ? उत्तर- हल्कू और मुन्नी ।
 6. 'पूस की रात' कहानी किस बात का संकेत करती है ? उत्तर-भारतीय किसान की त्रासदी का । 
7. 'तकदीर की खूबी है'। मजदूरी हम करें मजा दूसरे लूटें किसका कथन है ?
 उत्तर- उपरोक्त कथन हल्कू का है।
 8. भारतीय किसानों की प्रमुख समस्या क्या है ? उत्तर-निर्धनता और अशिक्षा । 
9. प्रेमचंद द्वारा लिखित कौन-कौन-सी कहानियाँ किसानों के जीवन पर लिखी गयी हैं ? 
उत्तर-पूस की रात, 'कफन', गोदान आदि। 
10. प्रेमचंद मूलतः किस विधा के रचनाकार हैं ?
 उत्तर- कहानी और उपन्यास । 
11. हल्कू के बुलाने पर भी जबरा क्यों नहीं आया ? उत्तर- क्योंकि नीलगायें खेत चर रही थीं।
 12. मुन्नी कौन थी ?
 उत्तर- हल्कू की धर्मपत्नी । 
13. जवरा कौन था ? 
उत्तर-हल्कू का स्वामीभक्त कुत्ता । 
14. सहना कौन था ? 
उत्तर-महाजन । 
15. प्रेमचंद की पहली कहानी का क्या नाम है ? 
उत्तर- पंच परमेश्वर । 
16. हल्कू पक्का इरादा कर क्यों उठा ? 
उत्तर-खेत को जानवरों से बचाने के लिए ठंड की परवाह नहीं करते हुए हल्कू पक्का इरादा कर उठा किन्तु बिच्छू के डंक से चुभने वाली ठंड से परास्त होकर अलाव के पास आकर बैठ गया। राख को कुरेद कर अपनी देह को गरमाने लगा।
17. "मुन्नी से कल न कह देना नहीं तो लड़ाई करेगी" यह किसका कथन है? 
उत्तर- हल्कू अलाव से जलने की आशंका पर जबरा से उपरोक्त बातें कहता है। 
18. हल्कू रात में खेत पर क्यों गया था ? 
उत्तर- नीलगायों से फसल की रक्षा करने के लिए खेत पर गया था। 
19. ठंढ से बचने के लिए हल्कू ने किया ? 
उत्तर-बगीचे की पत्तियों के अलाव में लगाकर तापता रहा। फिर भी ठंढक नहीं मिटी । वह जबरा को गोद में सुला लिया।
 20. नीलगायें क्या कर रही थीं ?
 उत्तर- नीलगायें खेत में फसलों को सफाया और बरबाद कर रही थीं।
 21. सहना ने हल्कू को कितने रुपये कर्ज दिये थे ? उत्तर- सहना ने हल्कू को कर्ज के तीन रुपये मात्र दिए। 22. जबरा छतरी के बाहर आकर क्यों भूँकने लगा ? उत्तर- किसी जानवर की आहट पाकर । 
23. हल्कू अरहर के पौधों को उखाड़ कर क्या किया ? उत्तर- झाडू बनाया । 
24. जबड़ा क्या चिचोड़ रहा था ? 
उत्तर- हड्डी। 
25. हल्कू गर्म राख के पास बैठकर क्या गुनगुनाने लगा? उत्तर- एक गीत । 
26. हल्कू को क्या मालूम हुआ ? 
उत्तर- जानवरों का एक झुंड खेतों में आया है। 
27. हल्कू ने बैठे-बैठे क्या आवाज लगायी ? 
उत्तर-लिहो-लिहो ! लिहो !! 
28. मुन्नी ने खेत पर जाकर सबेरे हल्कू को क्या खबर दी ? 
उत्तर- फसलों की बरबादी की। ने क्या बहाना बनाया ? 29. हल्कू उत्तर- पेट दर्द का ।
 30. दोनों फिर कहाँ गए ? 
उत्तर- खेत की डाँड़ पर । 
31. हल्कू कहाँ रात बिता रहा था ? 
उत्तर- खेत पर ।
 32. हल्क कैसे जान सका कि रात अभी पहर भर बाकी है?
 उत्तर- सप्तर्षि तारों को देखकर ।
 33. दोनों खेत की दशा देख रहे थे? वे कौन थे ?
 उत्तर- हल्कू और मुन्नी । 
34. बाकी चुकाने के लिए ही तो हमारा जनम हुआ है, किसने कहा था ?
 उत्तर- मुन्नी ने ।
 35. 'गोदान' किसकी महान कृति है ? 
उत्तर- प्रेमचंद की। 
36. प्रेमचंद ने शुरू में किस भाषा में लिखना शुरू किया था ? 
उत्तर- उर्दू में।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर 
निम्नलिखित लघुउत्तरीय प्रश्नों के उत्तर अति संक्षेप में दें-

 प्रश्न 1. हल्कू कंबल के पैसे सहना को देने के लिए क्यों तैयार हो जाता है ?
 उत्तर- सहना एक महाजन है। हल्कू उससे कर्ज लिया था। मजदूरी द्वारा उपार्जित रुपये में से बचाकर उसकी पत्नी तीन रुपये रखी थी। माघ पूस की ठंढ से बचने के लिए कंबल खरोदना अनिवार्य था किन्तु एक तरफ सहना की गाली और घौंस का भय था तो दूसरी तरफ पूस की ठंढ से बचने की चिंता । विवश होकर हल्कू अपनी पत्नी से डरते हुए रुपये की मांग करता है और सहना को रुपये देने के लिए तैयार हो जाता है।

 प्रश्न 2. हल्कू ने जबरा के आगे ठंढ काटने के लिए क्या आश्वासन दिया ?
 उत्तर-हल्कू का स्वामिभक्त कुता जबरा है। पूस की रात में हल्क जबरा के साथ खेत की रखवाली करने के लिए झोपड़ी में पड़े खाट पर पड़ा है। कड़कती ठंड से बचने के लिए हल्कू चिलम पीता है। जबरा भी पेट में मुँह सटाकर ठंढ से कूं-कूं कर रहा है। जबरा की पीड़ा से पीड़ित होकर हल्कू उसे सांत्वना देता है कि आज की रात काट ले। मैं कल तुम्हारे लिए पुआल बिछा दूँगा और तुम आराम से सोना। इस आत्मीयता के लिए जबरा अपने पंजे को हल्कू के घुटनों पर रखकर आभार प्रकट करता है।

 प्रश्न 3. हल्कू और जबरा की मैत्री को लेखक ने अनोखा क्यों कहा है ? 
उत्तर-पूस की ठंढी रात में हल्कू जबरा के साथ खेत की रखवाली कर रहा है। हल्कू एक मनुष्य है जबकि जबरा पशु फिर भी दोनों में आत्मीयता है। जबरा के प्रति कृतज्ञता और आत्मीयता की स्थिति में अपनी गरीबी और दीनता से हल्कू आहत नहीं होता। जबरा सुख-दुःख में हल्कू का साथी है। सांत्वना भरी बातों से प्रभावित होकर जवरा अपने पंजे को हल्कू की घुटनियों पर रख देता है और उसके मुँह के पास मुँह ले जाकर अभिन्न मित्र या भाई की तरह व्यवहार करता है। इसे ही लेखक ने आत्मीय संबंध या अनोखी मैत्री कहा है।

 प्रश्न 4. हल्कू कैसे जान सका कि रात अभी पहर भर बाकी है ?
 उत्तर-वह आकाश में सप्तर्षि मंडल को देखता है जो आकाश में आधे पर भी नहीं चढ़े है। इस प्रकार हल्कू को सप्तर्षि मंडल द्वारा पहर भर बाकी रात का आभास हो जाता है।

प्रश्न 5. जब ठंढ बर्दाश्त से बाहर हो जाती है तो हल्कू उसका सामना कैसे करता है ?
 उत्तर- 'पूस की रात' का नायक हल्कू जबरा कुत्ते के साथ पूस को ठंडी रात में खेतों की रखवाली कर रहा है। ठंढ काफी बढ़ गई है और शरीर का रक्त जमने लगा है। धमनियों में रक्त को जगह हिम वह रहा है। वह पत्तियों को बटोरकर अलाव जलाता है और आग तापने लगता है। वह अपने दोहर को उतारकर बगल में दबा लेता है और दोनों पाँव फैलाकर ठंढ को ललकारने की स्थिति में कहता है-तुम मेरा क्या बिगाड़ लोगे ? ठंढ की असीम शक्ति पर वह विजय पाकर गर्व से अतिशय प्रसन्न था।

 प्रश्न 6. हल्कू और मुन्नी दोनों के चरित्र की विशेषताएं बताएं। आपको इन दोनों में अधिक महत्वपूर्ण कौन लगा? 
उत्तर-‘पूस की रात' प्रेमचंद की कहानी है। इसके दो मुख्य पात्र हैं-एक हल्कू और दूसरे मुन्नीं। हल्कू भाग्यवादी और समझौतावादी दीन-हीन किसान है। मुन्नी अन्याय के प्रति विद्रोह करने वाली नारी है। हल्कू के लिए खेती मान-सम्मान की थाती है जबकि मुन्नी ऐसे निरर्थक मान-सम्मान को महत्त्व नहीं देती क्योंकि तन ढंकने के लिए वस्त्र और पेट भरने के लिए रोटी महत्त्वपूर्ण चीज है।

 प्रश्न 7. हल्कू खेत पर कहाँ और कैसे रात बिता रहा था? 
उत्तर- हल्कू 'पूस की रात' जो प्रेमचंद की महत्वपूर्ण कहानी है, का नायक है। वह खेत के किनारे बनी ईख के पत्तों की झोपड़ी में पड़ी खाट पर स्वामिभक्त कुत्ता जबरा के साथ खेतों की रखवाली कर रहा था। उसके पास ठंड से बचने के लिए पुराने गाढ़े चादर के अलावा कुछ नहीं था। जबरा और हल्कू दोनों ठंढ से थर-थर काँपते हुए रात काट रहे थे । 

प्रश्न 8. हल्कू की आत्मा का एक-एक अणु प्रकाश से चमक रहा था। इसके पीछे क्या कारण था ? 
उत्तर- 'पूस की रात' कहानी में प्रेमचंद जी ने मैत्री भाव का सही चित्रण हल्कू और जबरा कुत्ते के माध्यम से प्रस्तुत किया है। ठंढ से व्याकुल कुत्ते को जब हल्कू ने गोद में उठा लिया तो उसे ठंढ से राहत मिली। इस ऊत्मीयता और सहानुभूति से मनुष्य और जानवर के बीच का भेद मिट गया। हल्कू के चेहरे पर वैसे ही प्रसन्नता फूट पड़ी जैसे मित्र के सुख पर प्रसन्नता होती है। वस्तुतः मैत्री में भेद नहीं भावना की प्रबलता होती है, 

प्रश्न 9. मुन्नी की नजर में खेती और मजूरी में क्या अन्तर है ? वह हल्कू को खेती छोड़ देने के लिए क्यों कहती है? 
उत्तर- प्रेमचंद की यथार्थवादी कहानी 'पूस की रात' की नायिका मुन्नी है। वह हल्कू की पत्नी है। उसकी नजर में खेती और मजूरी में बड़ा अंतर दीखता है। जो अपने खेत में खेती-बारी करता है वह खेती यानि कृषि कही जाती है। दूसरी ओर जो आदमी बिना खेत- बधार के दूसरों के खेत में जहाँ-तहाँ काम करता है, उसे मजूरी कहते हैं। मुन्नी को अपनी खेती में लगान, मालगुजारी देने के लिए कभी-कभी कर्ज लेना पड़ता है जिससे उबरना मुश्किल होता है, जबकि दूसरी तरफ मजूरी करने में किसी प्रकार का झंझट मोल लेना नहीं पड़ता। इसीलिए वह हल्कू को खेती छोड़ देने के लिए कहती है।

 प्रश्न 10. लेखक ने पवन को 'निर्दय' क्यों कहा है ? निर्दय पवन द्वारा पत्तियों का कुचलना से आप क्या समझते हैं ? 
उत्तर- 'घूस की रात' कहानी का नायक हल्कू जबरा कुत्ते के साथ पूस की ठंढी रात में खेत की रखवाली कर रहा है। ठिठुरती रात की भयंकर शीतलहरी उसके लिए कोढ़ की खाज की तरह है। वसनविहीन दीन हल्कू पर निर्दयों हवा को भी दगा नहीं आती। वह अपने तेज वेग से उंढक को और बढ़ा देती है। हल्कू के धमनियों में रक्त जमने लगता है और रक्त की जगह हिम बहने लगता है । वह बगीचे से पत्तियों को बटोरकर अलाव की व्यवस्था करना चाहता है।  पवन की तीव्र वेग से आहत पत्तियाँ झंकृत हो रही हैं। जिस प्रकार मतवाला हाथी हरे-भरे फसलों को अपने पाँवों से रौंद डालता है, ठीक उसी प्रकार वेगमयी हवा निर्दय होकर पत्तियों को कुचल रहा था।

 प्रश्न 11. आग तापते हुए हल्कू कैसी क्रीड़ा करता है? अपने शब्दों में वर्णन करें ? 
उत्तर- हल्कू जबरा के साथ पूस की ठंढी रात में खेत की रखवाली कर रहा है। उसके पास कंबल नहीं है। जब ठंढक ज्यादा बढ़ जाती तो वह जबरा को गोद में सुला लेता है, उससे घृणा नहीं करता। फिर भी ठंढ से मुक्ति नहीं मिलती। वह बगीचे से पत्तियाँ बटोरकर अलाव में आग लगाता है। आग तापता है। दोहर को बगल में दबा लेता है। ठंढ को चुनौती देता है। तुमसे मुझे कोई परवाह नहीं। वह जबरा को अलाव को कूदकर पार करने के लिए कहता है। साथ ही जलने पर इसकी शिकायत मुन्नी से नहीं करने की हिदायत भी देता है। जबरा बार-बार कूदकर अलाव के पास बैठता है। इस प्रकार हल्कू जाड़े की कंपकपाती रात गुजारने के लिए कुछ क्षण अपनी दीन-हीन अवस्था को भुलाकर मनोरंजन करता है। 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
 निम्नलिखित दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर 60 शब्दों में दें-

 प्रश्न 1. प्रेमचंद का संक्षिप्त साहित्यिक परिचय दें।
 उत्तर- प्रेमचंद के साहित्य में आदर्श और यथार्थ का अपूर्व समन्वय दिखाई पड़ता है। इनके उस समन्वय को हिन्दी में आदर्शोन्मुख यथार्थवाद कहा गया है। उनके साहित्य में देशभक्ति, राष्ट्रीय जागरण और समाज-सुधार का प्रबल स्वर दिखाई पड़ता है। उन्होंने अपनी रचनाओं में भारतीय ग्रामीण परिवेश और किसानों के जीवन के विविध पक्षों का सटीक चित्रण किया है। कफन, घूस की रात, गोदान, 'सो जे वतन' आदि कृतियों में शोषण के विरुद्ध मूक विद्रोह की आवाज सुनाई पड़ती है। उन्होंने समाज में व्याप्त अन्य बुराइयों प्रथा, अनमेल विवाह, नशाखोरी, शोषण, बहु-विवाह, जुआछूत, ऊँच-नीच आदि पर तीखा व्यंग्य करते हुए समाज सुधार की वकालत की है। मुहावरेदार, लोकोक्तियों से युक्त सरल, बोधगम्य आम आदमी की भाषा में इन्होंने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की हैं। "प्रेमचंद जी ने भारतीय गाँवों की विविध समस्याओं एवं किसानों को दयनीय, अभावग्रस्त जीवन की अनेक विसंगतियों की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट किया है।
 प्रश्न 2. 'पूस की रात' कहानी का सारांश लिखें। ''
उत्तर- 'पूस की रात' कथा सम्राट प्रेमचंद जी द्वारा रचित एक चर्चित यथार्थवादी कहानी है। आलोच्य कहानी की कथावस्तु का संबंध हमारे ग्रामीण जीवन से है। इसमें कहानीकार ने एक गरीब किसान की समस्याओं से भरी जिंदगी की व्यथा-कथा का अंकन किया है। इस कहानी का प्रधान नायक है- हल्कू। यह एक भारतीय किसान का प्रतीक रूप है। हल्कू कर्ज के बोझ से दबा है। कहानी के शुरू में सहना नायक एक महाजन हल्कू से कर्ज के बाकी तीन रुपये मांगने आता है। हल्कू जाड़ा से बचाव के लिए कंबल खरीदने हेतु तीन रुपये जमा किये थे। वह अपनी पत्नी मुन्नी से उन रुपयों की मांग कर सहना को लौटाने के लिए कहता है। मुन्नी साफ इनकार कर जाती है। वह स्पष्ट रूप से कहती है कि रुपये दे देने पर बिना कंबल के माघ-पूस की उद से कैसे बचाव होगा ? वह फसल कटने के बाद रुपये लौटाने की सलाह देती है। उसकी बातों में सच्चाई है, लेकिन हल्कू सहना महाजन की गाली और घौंस बर्दाश्त करने में अपने को अक्षम् पाता है, क्योंकि वह जाड़ा से अधिक कष्टदायी और अमानवीय है। अंततः वह सहना को रुपये दे देता है। कहानी के दूसरे चरण में कथा नायक हल्कू पूस की ठिठुरती रात में फसल की रक्षा करने के लिए खेत पर जाता है। वह खेत के किनारे ईख के पत्तों की एक छतरी के नीचे बैठकर फसल की रखवाली का प्रयास करता है। उसके पास ठंढ में अपनी उपयोगिता खो चुकी है। उसके बगल में उसका प्रिय कुत्ता जबरा पेट में मुँह डाले सर्दी से ठिठुरता कूं-कूं कर रहा है। शीतलहरी की मार से परेशान हल्क शरीर में गर्मी लाने के लिए हर संभव प्रयास करता है। वह लगातार कई चिलम पीता है, फिर पत्तों को बटोरकर अलाव जलाकर तापता है, फिर इसी क्रम में जबरा को अपनी गोद में लिपटा लेता है। उसी समय खेत में किसी जानवर के घुसने की आहट सुनाई पड़ती है जिसे सुनकर जबरा उस ओर दौड़ पड़ता है और जोर-जोर से पूँकने लगता है। हल्कू चाहकर भी उस भीषण शीतलहरी में उस ओर जाने का साहस नहीं जुटा पाता और दो-तीन कदम चलकर फिर बुझे हुए अलाव के पास आकर बैठ जाता है। जबरा भूँकता रहता है और इधर-उधर दौड़कर अपन क्रियाशीलता का परिचय देता रहता है। उधर नीलगायों का झुंड खेत की फसल को बरबाद क देता है। सुबह हल्कू की पत्नी मुन्नी खेत पर आती है और हल्कू को फटकारती हुई फसल बर्बादी का हाल सुनाती है। हल्कू पेट-दर्द का बहाना बनाकर अपनी लाचारी प्रकट करता है वह फसल नष्ट होने पर भी प्रसन्न है, क्योंकि उसे अब रात की ठंढी में खेत पर सोना नहीं पड़ेग ।
                            व्याख्याएँ
 1. सप्रसंग व्याख्या करें :- " और एक-एक भाग्यवान ऐसे पड़े हैं, जिसके पास जाड़ा जाय तो गर्मी से घबरा भागे। मोटे-मोटे गद्दे, लिहाफ, कंबल, मजाल है जो जाड़े का गुजर हो जाय। तकदीर...............।
उत्तर- ये पंक्तियाँ 'पूस की रात' शीर्षक पाठ से ली गई हैं। इन पंक्तियों के लेखक कथा सम्राट प्रेमचंद जी । प्रेमचंद जी ने हल्कू के कथन के माध्यम से गरीबों की दीन मानसिकता और बेबसी का कारुणिक वर्णन किया है। पूस की ठंढी रात में हल्कू के पार से बचने के लिए एक कंबल भी नहीं है। वह ठंड से बचाव के लिए अलाव के पास बैठकर रातें काटता है। चिलम पीता है। जबरा कुत्ते को गोद में साटकर गर्मी से निजात पाना चाहता है। फिर भी उसे ठंढ से छुटकारा नहीं मिल पाता है। दूसरी ओर, समाज में ऐसे भी कई भाग्यवान लोग हैं, जिन्हें जाड़ा से बचने के लिए कोई चिंता नहीं। उनके पास तो मोटे-मोटे गुद्दे, आरामदायक कंबल, लिहाफ एवं रजाईयाँ हैं। ऐसे लोगों को जाड़ा क्या डराएगा बल्कि उनके साधन के आगे जाड़ा भी डर से सरक जाता है। इसी क्रम में गरीब हल्कू दीन-हीन इन्सान की तरह भाग्य की दुहाई देकर अपनी दुर्दशा पर तरस खाता है। 

पाठ्य पुस्तक पर आधारित प्रश्नोत्तर

 प्रश्न 1. हल्कू कंबल के पैसे सहना को देने के लिए क्यों तैयार हो जाता है ? 
उत्तर- आदर्शोन्मुखी यथार्थवादी कथा सम्राट प्रेमचंद रचित आलोच्य कहानी "पूस की रात' कहानी का नायक है-गरीब किसान हल्कू । हल्कू की स्त्री उसकी मजदूरी के पैसे में से बड़ी कठिनाई से तीन रुपये बचाकर माघ पूस की ठंढ काटने के लिए कंबल खरीदने हेतु रखी थी। सहना रुपये माँगने आता है। सहना के कर्ज से मुक्ति पाने के लिए वह अपनी पत्नी से रुपये माँगता है। हल्कू अनिश्चतता की स्थिति में होता है। एक तरफ उसके मन में पूस महीना का कंबल के बिना हार में रात नहीं कटने का डर होता है तो दूसरी तरफ सहना की घुड़कियाँ और गाली का डर होता है। वह फसल के बाद रुपये देने की बात कहती है। उसकी बातों में कड़वी सच्चाई होने के बावजूद हल्कू महाजन को गाली और धौंस बर्दाश्त नहीं करना चाहता। हल्कू की नजर में महाजन की गाली पूस के जाड़ा से अधिक कष्टप्रद है। इसलिए वह कंबल के पैसे सहना को देने के लिए तैयार हो जाता है। 

प्रश्न 2. मुन्नी की नजर में खेती और मजूरी में क्या अन्तर है? वह हल्कू से खेती छोड़ देने के लिए क्यों कहती है ?
 उत्तर- 'पूस की रात' कहानी की नायिका मुन्नी की नजर में खेती की अपेक्षा मजूरी में अधिक सुख चैन है। मजूरी करने पर दे रोटी चैन से मिलने के साथ-साथ महाजन की धौंस भी नहीं सहनी पड़ती है। प्रस्तुत कहानी में हल्कू ने सहना से तीन रुपये कर्ज लिए हैं जिसकी वसूली के लिए उसपर बार-बार दबाब पड़ता रहा है। दबाव की वह पीड़ा उसकी पत्नी के लिए असह्य है। वह जानती है कि थोड़ी-सी खेती के लिए कर्ज लेना पड़ता है। खेत में मर-मरकर काम करने से यदि कुछ फसल हाथ भी लगती है तो महाजन उसे देखकर कर्ज की बाकी राशि के लिए टूट पड़ते हैं। लगता है उसका जन्म कर्ज चुकाने के लिए ही हुआ है। अतः वह हल्कू को खीझ भरे स्वर में खेती छोड़ देने के लिए कहती है। 

प्रश्न 3. हल्कू खेत पर कहाँ और कैसे रात बिता रहा था? उत्तर- हल्कू अपने खेत के किनारे ऊख के पत्तों की एक छतरी के नीचे बाँस के खोले पर अपनी पुरानी गाढ़े की चादर ओढ़े पड़ा-पड़ा काँप रहा था। पूस की ठिठुरती रात में फसल की रक्षा करते हुए हल्कू अतिशय कष्टप्रद स्थिति का सामना करता है। पुरानी चादर के ओढ़ने से काम नहीं चलने पर वह रात काटने के लिए आठ चिलम पीता है और पत्तियों को बटोरकर अलाव जलाता है। अंत में कोई उपाय न देखकर वह अपने संगी कुत्ते जवरे के दुर्गन्धयुक्त शरीर को अपनी गोद में चिपका लेता है।

 प्रश्न 4. हल्क ने जबरा के आगे ठंढ काटने के लिए क्या आश्वासन दिया ? उत्तर-पूस की ठंढी रात में हल्कू अपने स्वामीभक्त श्वान जबरा के साथ फसल की रक्षा के लिए अपने खेत के किनारे बनी झोपड़ी में खटोले पर पड़ा है। पूस को जाड़ा पिशाच की भाँति उसको छाती दबाए जा रहा है। खाट के नीचे उसका संगी कुत्ता जबरा पेट में मुँह डाले सर्दी से कूँ-कूँ कर रहा था । घूस की ठिठुरती रात में हल्कू ठंढ से बचने के लिए चिलम पीता है और इसी क्रम में जबड़ा से कहता है, "पियेगा चिलम ? जाड़ा तो क्या जाता है। हाँ मन बहल जाता है ।" जबरा प्रेम की छलकती हुई आँखों से हल्कू को देखता है। हल्कू जाड़े से त्रस्त जबरा को सांत्वना देना चाहता है। वह जबड़ा को अगली रात में ठंढ से बचाने के लिए उसके सोने की व्यवस्था करने का आश्वासन देते हुए कहता है- आज और जाड़ा खा ले। कल से मैं यहाँ पुआल बिछा दूँगा । उसी में घुसकर बैठना, तब जाड़ा न लगेगा। जबरा ने अगले पंजे हल्कू के घुटनों पर रख दिए और मुँह पास ले गया, मानो वह उसका आभार प्रकट कर रहा है।

 प्रश्न 5. हल्कू की आत्मा का एक-एक अणु प्रकाश से चमक रहा था। इसके पीछे क्या कारण था ? उत्तर- प्रस्तुत कहनी में हल्कू पूस को ठिठुरती रात में जबरा कुत्ते को उठाकर उसके दुर्गन्ध युक्त शरीर को अपनी गोद में लिपटा लेता है। उस समय हल्कू के मन में जबरा के दुर्गन्ध युक्त शरीर से कोई घृणा नहीं होती । वस्तुतः जबरा हल्कू के दुःख-सुख का साथी है। हल्कू की पवित्र आत्मा में जबरा के प्रति कृतज्ञता और आत्मीयता की स्थिति में हल्क अपनी गरीबी या दोनता से आहत अथवा पीड़ित नहीं रहता। उसका तो रोम-रोम जबरा के स्नेह और अनोखी मैत्री से उत्फुल्ल हो जाता है । उसकी आत्मा उदारता, स्नेहशीलता दरिद्रता ने उसे जिस दुर्दशा के धरातल पर लाकर खड़ा किया था, वह उससे ऊपर उठ जाता है। उसकी आत्मा का कण-कण प्रेम और उल्लास के प्रकाश से जगमगा उठता है। 

प्रश्न 6. हल्कू और जबरा की मैत्री को लेखक ने अनोखा क्यों कहा है ? 
उत्तर-वस्तुतः जबरा उसके सुख-दुःख का साथी है। हल्कू के पवित्र आत्मा में जबरा के लिए कोई दुराव नहीं रहता है। जबरा के प्रति कृतज्ञता और आत्मीयता की स्थिति में हल्कू अपनी गरीबी या दीनता से आहत या पीड़ित नहीं रहता। जबरा भी अपने अगले पंजे उसकी घुटनियों पर रख दिए और उसके मुँह के पास अपना मुँह ले गया मानो किसी अभिन्न मित्र या भाई से गले मिल रहा हो । अतः लेखक ने जबरा और हल्कू के इस आत्मीय सम्बन्ध को अनोखी मैत्री कहा है। 

प्रश्न 7. हल्कू कैसे जान सका कि रात अभी पहर भर बाकी है ? उत्तर- प्रस्तुत प्रश्न के आलोक में ठंढ से रात कट नहीं रही है तब हल्कू झुककर आकाश की ओर देखा, अभी रात कितनी बाकी है। सप्तर्षि अभी आकाश में आधे भी नहीं चढ़े हैं। सप्तर्षि को देखकर उसे पता चल जाता है कि रात अभी पहर भर बाकी है। 

प्रश्न 8. जब ठंढ बर्दाश्त से बाहर हो जाती है तो हल्कू उसका सामना कैसे करता है ? 
उत्तर- "पूस की रात" कहानी एक गरीब किसान की व्यथा-कथा है। बगीचे में पत्तियाँ बटोरकर अलाव जलाता है। हल्कू अलाव के सामने बैठकर आग तापता है। वह अपने दोहर उतारकर बगल में दबा कर दोनों पैर फैला देता है, मानो ठंढ की ललकार रहा हो तुम मेरा क्या बिगाड़ लोगे ? ठंढ की असीम शक्ति पर विजय पाकर वह विजय-गर्व को हृदय में छिपाने पर भी नहीं छिपा पाता है।
 प्रश्न 9. लेखक ने पवन को निर्दय क्यों कहा है ?
 निर्दय पवन द्वारा पत्तियों का कुचलना से आप क्या समझते हैं ? उत्तर- भीषण जाड़े की ठिठुरती रात की भयंकर शीतलहरी हल्कू के लिए 'कोढ़ में खाज' की तरह है। ठिठुरती जाड़े की रात में इस वसन-विहीन दीन पर निर्दयी हवा को भी दया नहीं आती है। वह अपने तेज वेग से ठंढक को और बढ़ा देता है। गरीब किसान हल्कू की दयनीय दशा को नजर अंदाज कर अपने वेग में निरन्तर तेजी से बहता है। हवा के कारण शीत और धधकने लगता है। हवा के इस निर्दयता के कारण हल्कू को ऐसा लगता है जैसे उसका सारा रक्त जम गया है, धमनियों में रक्त की जगह हिम बह रहा है। हल्कू से अब रहा नहीं जाता वह बगीचे में पत्तियाँ बटोरने जाता है, ताकि अलाव की व्यवस्था कर वह टाँठे हो जाए। बगीचे में घुप अंधेरा छाया हुआ है। पवन की तीव्र वेग से आहत पत्तियाँ झंकृत हो रही हैं। जिस प्रकार मतवाला हाथी हरे-भरे फसल को अपने पाँवों से रौंद डालता है, ठीक उसी प्रकार वेगमयी हवा निर्दय होकर पत्तियों को कुचल रहा था । 

प्रश्न 10. आग तापते हुए हल्कू कैसी क्रीड़ा करता है ? अपने शब्दों में वर्णन करें। उत्तर- दानवी ठंढ से मुक्ति के लिए वह बगीचे से पत्तियाँ बटोरकर अलाव जलाता है। हल्कू अलाव के सामने बैठकर आग तापता है। वह अपने दोहर उतारकर बगल में दबाकर दोनों पाँव फैला देता है, मानो वह ठंढ को चुनौती देता है कि अब तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। ठंढ की असीम शक्ति पर विजय पाकर वह विजय-गर्व को हृदय में छिपा नहीं पाता है। वह जबरा से पूछता है-क्यों जबरा, अब ठंढ नहीं लग रही है ? हल्कू जबरा को कूदकर पार करने के लिए कहता है, साथ ही हिदायत भी देता है कि अगर अलाव पार करने में वह जल जाता है तो इसकी शिकायत मुन्नी को नहीं करना है। वह उछल कर अलाव के ऊपर से साफ निकल जाता है। पैरों में जरा लपट लगी पर वह इसकी परवाह नहीं करता। जबरा आग के गिर्द में घूमकर उसके पास आ खड़ा होता है । हल्कू कहता है यह सही नहीं है। मैंने तुझे अलाव के ऊपर से कूदकर आने को कहा था। ऊपर से कूदकर आओ। वह फिर कूदता है और अलाव के इस पार आकर बैठता है । इस प्रकार हल्कू जाड़े की कंपकपाती रात गुजारने के लिए कुछ क्षण अपनी दीन और असहाय स्थिति को भुलाकर मनोरंजन करता है।
 प्रश्न 11. हल्कू और मुन्नी दोनों के चरित्र की विशेषताएं बताएँ। आपको इन दोनों में से अधिक महत्वपूर्ण कौन लगा ? 
उत्तर- हल्कू का चरित्र: हल्कू प्रेमचंद रचित 'पूस की रात' शीर्षक कहानी का मुख्य पात्र है। वह एक गरीब किसान है जो महाजनी के बोझ तले दबा है। उसमें विविध चारित्रिक - दुर्बलताओं एवं विशेषताओं का अपूर्व समावेश है, जो उसे बराबर सबको सहानुभूति का पात्र बना देता है। यद्यपि वह अत्यन्त गरीब है, किन्तु बड़ा विनम्र, कृतज्ञ एवं संवेदनशील व्यक्ति है। मेहनत-मजदूरी करके खेती की फसल की आय को महाजन के हवाले करने से वह दुःखी अवश्य होता है, किन्तु क्रोध नहीं होता। जब पत्नी झुंझलाती हुई कहती है, “तुम क्यों नहीं खेती छोड़ देते ? मर-मर काम करो, उपज हो तो बाकी दे दो, बाकी चुकाने के लिए ही तो हमारा जन्म हुआ है, मैं रुपए न दूंगी।" उक्त बातें हल्कू की पत्नी मुन्नी ने सहना महाजन द्वारा हल्कू को अपनी ऋण चुकाने के लिए धमकाए जाने के संदर्भ में में कही। किन्तु हल्कू ने इस पर भी अपना धैर्य नहीं खोया, शांत एवं विनम्र बना रहा। हल्कू के चरित्र का एक दूसरा पक्ष भी है। वह एक डरपोक प्रकृति का आलसी, सुस्त एवं अकर्मण्य व्यक्ति है। स्वाभिमान के साथ ही अपनी क्षमता का भी उसे ज्ञान है। तभी उसने ठिठुरते जाड़े में कम्बल खरीदने के बजाय सहना महाजन का कर्ज चुकाना अधिक श्रेयस्कर समझा। नीलगायों द्वारा उसका खेत चर जाना और उसका सोते रह जाना आलस्य का ही उदाहरण है। इस प्रकार हल्कू के चरित्र में अनेकों अच्छाइयों एवं बुराइयों का अनोखा समिश्रण है। हल्कू एक थका-माँदा, उत्साह रहित पात्र है जो विनम्रता, नैतिकता, आलस्य एवं दब्बूपन को अपने अन्तर में समेटे हुए है। मुन्नी का चरित्र - मुन्नी 'घूस की रात' शीर्षक कहानी की नायिका है। वह निर्धन किसान की पत्नी है। उसका पति हल्कू महाजनी ऋण तले दबा है। वह कुशल गृहणी पतिव्रता, कर्तव्यपरायण, उदार और भीतर से नर्म परन्तु जबान की गरम है। मुन्नी घर का कामकाज करती है। हल्कू के सुख-दुःख का बराबर ख्याल रखती है और चाहती है कि जाड़े में वह कम्बल खरीद ले। वह दबंग महिला है जो अन्याय सहना नहीं चाहती। जब हल्कू उधार न देने पर सहना द्वारा गाली-गलौज करने की बात करता है तो तड़प जाती है-'गाली क्यों देगा ? क्या उसका राज है ?' किन्तु सच्चाई के आगे झुक जाती है और रुपये दे देती है। मुन्नी संघर्षशील और कर्तव्यपरायण आदर्श भारतीय नारी है जो पति के विभव के क्षय हो जाने पर भी उसकी कदम से कदम मिलाकर दीनहीन जीवन के काँटेदार पथ पर अनवरत अग्रसर है। वह एक आदर्श मित्र भी है, जो प्रेयसी के गुणों में शामिल है। सहना द्वारा रुपये मांगने पर अपने पति को खीझ में सही खेती छोड़ देने की सलाह देना उसे एक हमदर्द मित्र की श्रेणी में खड़ा कर देता है। सुबह खेत में आकर अपने पति को जगाना-क्या आज सोते ही रहोगे ? तुम यहाँ आकर रम गए और उधर सारा खेत चौपट हो गया। मुन्नी का खेत पर आना उसके सजगता एवं कर्तव्यपरायणता का उदाहरण है । वास्तव में, मुन्नी एक गरीब किसान की व्यथा कथा का बिल्कुल स्वाभाविक और अनुकूल नारी है जो कर्ज के बोझ तले दबे गरीब किसान की पत्नी है । कर्तव्यनिष्ठता, उदारता, त्याग और बलिदान के रास्ते में उसकी दीनता कभी रोड़े नहीं डालती है। वह सत्यनिष्ठ एवं आदर्श धर्मपत्नी है। मुन्नी का चरित्र संवेदनशील, सहानुभूति का सत्पात्र तथा दुःख-दर्दपूर्ण जीवन का सजीव दर्पण है। आलोच्य कहानी 'पूस की रात' में कहानीकार ने पात्र या चरित्र योजना को सार्थक और स्वाभाविक रूप से प्रस्तुत किया है। कहानी के नायक-नायिका-हल्कू और मुन्नी बिल्कुल स्वाभाविक और अनुकूल रूप में अपनी भूमिका का परिचय देते हैं। दोनों संघर्षशील पात्र हैं और कहानीकार तत्संबंधी उद्देश्य को साकार करने में अतिशय सफल प्रमाणित होते हैं। दोनों महाजनी के कर्ज तले दबे भारतीय पत्नी के सजीव प्रतिमूर्ति हैं। हल्कू आदर्श पति है तो मुन्नी कर्तव्यपरायण नारी । हल्कू विनम्रता, नैतिकता, आलस्य एवं दब्बूपन को अपने अन्दर समेटे हुए है तो मुन्नी कर्तव्यनिष्ठा, उदारता, दबंगता कठोर सत्य को स्वीकार करने वाली, विपत्ति में पति के साथ हमसफर बनकर चलने वाली त्याग और बलिदान की देवी है। विभव क्षय होने पर भी अपनी पति का सच्चा हमदर्द बनकर उसने भारतीय किसान की पत्नी के रूप में धर्मपरायण नारी समाज का सर गर्व से ऊँचा कर दिया है। अतः "यत्र नारी पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता" इस उक्ति को साकार करते हुए मुन्नी के चरित्र को श्रेयस्कर माना जाता है। मुन्नी ने कुशल गृहणी के रूप में परिवार के मान-सम्मान का संरक्षक बनकर नारी के आदर्शता को चरमोत्कर्ष पर पहुँचा दिया है।

 प्रश्न 12. यह कहानी भारतीय किसान के मजदूर बनने की त्रासदी की ओर संकेत करती है। कहानी के आधार पर स्पष्ट करें। 
उत्तर- प्रेमचंद रचित 'पूस की रात' शीर्षक कहानी ग्रामीण अंचल की एक यथार्थवादी कहानी है। इस चर्चित कहानी में कथाकार प्रेमचन्द ने एक गरीब किसान के माध्यम से भारतीय किसान की व्यथा-कथा का सजीव चित्र प्रस्तुत किया है। कहानी में भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था पर गहरा प्रहार किया गया है। यह ग्रामीण किसान की सामाजिक, आर्थिक तथा पारिवारिक परिदृश्य हमारे सामने साकार करता है। इस कहानी में भारतीय किसान का चरित्र काल्पनिक तथा अस्वाभाविक न होकर बिल्कुल स्वाभाविक तथा यथार्थवादी है। भारतीय किसान जीवन भर पेट की ज्याला को शान्त करने के लिए मेहनत-मजदूरी करता है, लेकिन खेती से प्राप्त फसल को वह महाजनों को भेंट चढ़ा देता है। हल्कू कहानी में किसान की भूमिका में है जिसकी हिम्मत भी दुःखों के पहाड़ के आगे झुक जाता है। उसकी पत्नी मुन्नी उसपर झुंझलाती हुई कहती है- “तुम क्यों नहीं खेती छोड़ देते ? मर-मर काम करो, उपज हो तो बाकी दे दो; चलो छुट्टी हुईं। बाकी चुकाने के लिए तो हमारा जनम हुआ है। पेट के लिए मजूरी करो। ऐसी खेती से बाज आए। मैं रुपये न दूँगी.. ..न दूंगी।" मुन्नी की उक्ति कि मजूरी करने से कम से कम दो रोटी चैन से तो खायेंगे। महाजन का तकादा तो नहीं सुनना पड़ेगा, भारतीय किसान को पजदूर बनने की ओर संकेत करती है। फसल नष्ट होने पर भी हल्कू का प्रसन्न होना, उसके किसान से मजदूर बनने की ओर इशारा करता है। इस कहानी के माध्यम से लेखक भारतीय कृषि व्यवस्था एवं ग्रामीण महाजनी पर कड़ा प्रहार किया है। 

प्रश्न 13. 'एस की रात' कहानी में 'जबरा' एक प्रमुख पात्र है। कहानी में उसका क्या महत्व है ?
 उत्तर- 'पूस की रात' आलोच्य कहानी की पात्र योजना सार्थक और स्वाभाविक है। जब कुत्ता है, जो पशु होकर भी अपनी मानव तुल्य भूमिका से हमें अभिभूत कर देता है। जबरा एक स्वामिभक्त और वफादार कुत्ता के रूप में हमारी संवेदनाओं को झंकृत कर देता है। पूस की ठिठुरती रात की भयंकर शीतलहरी में भी जबरा कर्तव्यनिष्ठ और चुस्त बनकर अपने स्वामी हल्कू के साथ खेत पर फसल की रक्षा के लिए तत्पर है। पूस की ठिठुरती रात में ठंडी से बचने के लिए हल्कू चिलम पीता है और इसी क्रम में जबरा से कहता है, "पियेगा चिलम ? जादा तो क्या जाता है। हाँ, जरा मन बहल जाता है।" प्रत्युत्तर में जबड़ा द्वारा प्रेम से छलकती हुई आँखों से हल्कू का देखना और अपना अगला पंजा हल्क के घुटने पर रखकर मुँह के पास मुँह ले जाना उसके मानवीय गुण दोस्ती, कृतज्ञता तथा विनम्रता को प्रदर्शित करता है। हल्कू गरीब किसान था, वह जबरा के रहन-सहन, खान-पान को समुचित व्यवस्था नहीं कर पाता था, परन्तु जबरा सच्चे मित्र की भाँति उसके दुःख-दर्द में शामिल होकर अपनी वफादारी और स्वामिभक्ति को प्रतिस्थापित करता है। जबरा पशु है परन्तु मनुष्य की भाँति उसका आचरण है। वह ठिठुरती ठंढ में खुद कूं-कूँ करता रहता है परन्तु अपने मालिक को अकेला छोड़कर घर नहीं जाता है। नीलगायों को खेत में प्रवेश करने पर जबरा अपना गला फाँड़े डालता है। कर्तव्य उसके हृदय में अरमान की भाँति उछल रहा था। मालिक द्वारा जबरा, जबरा की आवाज लगाने पर भी वह नीलगायों को भगाने के लिए अपने कर्तव्य पथ पर अड़ा रहता है। मड़ैया में जबरा का चित लेटना उसके कर्तव्य पथ पर शहीद होने का संकेत देता है। वस्तुतः जबरा के बिना कहानी जीवंत नहीं हो पाता। कहानी में जबरा की उपस्थिति ने इसे आदर्श की ओर ज्यादा झुका दिया है।
 प्रश्न 14. निम्नलिखित वाक्यों की सप्रसंग व्याख्या करें- 
(क) बाकी चुकाने के लिए ही तो हमारा जनम हुआ है। उत्तर- प्रस्तुत पंक्ति हिन्दी साहित्य के आधार स्तम्भ, ग्रामीण अंचल कहानी के पुरोधा, सेवा सदन, गोदान, गवन के अमर रचनाकार प्रेमचंद द्वारा रचित चर्चित कहानी 'पूस की रात' से ली गई है। इन पक्तियों में कहानीकार ने ग्रामीण जीवन में व्याप्त गरीबी की विकराल समस्या के साए में पल रही कर्जखोरी, सूदखोरी तथा महाजनी शोषण पर तीखा प्रहार किया है। सहना से कर्ज लिए तीन रुपये की अदायगी के लिए उसपर बार-बार दबाव पड़ता जो उसकी पत्नी के लिए असह्य है। वह खीझ भरे स्वर में पति से खेती छोड़ देने के लिए कहती है। खेत में मर-मरकर काम करने से यदि कुछ फसल हाथ भी लगती है तो महाजन उसे देखकर कर्ज की बाकी राशि के लिए तंग करते हैं। लगता है उसका जन्म कर्ज चुकाने के लिए ही हुआ है। वह अपनी दीनता पर दुखी है। कर्ज लेकर खेती करना, हाड़तोड़ मेहनत करना और फिर उससे प्राप्त अनाज बेचकर उसे महाजनों का कर्ज चुकाना पड़ता है। इस वाक्य से एक गरीब किसान की बेबसी परिलक्षित होती है। 

(ख) हल्कू ने रुपये लिए और इस तरह बाहर चला मानो अपना हृदय निकालकर देने जा रहा हो। 
उत्तर- प्रस्तुत पक्तियाँ हिन्दी साहित्य शिरोमणि प्रेमचंद द्वारा रचित चर्चित आंचलिक यथार्थवादी कहानी 'पूस की रात' शीर्षक कहानी से उद्धृत हैं। यह कहानी मध्ययुगीन यूरोप के सामंतवाद की याद दिलाती है जहाँ किसानों का एक वर्ग अर्धदास कहलाता है। हल्क इस कहानी का नायक है जो बेवश तथा दीन-हीन इन्सान है जो अपनी दुर्दशा से अभिशप्त है। हल्कू के यहाँ सहना के तीन रुपये बाकी थे। अपनी बकाया राशि की वसूली हेतु वह हल्कू के पास आया था । हल्कू जानता था कि सहना आया है तो अपनी रकम लिये बिना लौटेगा नहीं। रकम नहीं देने पर घुड़कियाँ जमायेगा, गाली देगा। इससे बचने के लिए तो उसकी रकम लौटानी ही होगी। उरु ने कम्बल खरीदने के लिए किसी तरह तीन रुपये बचाए थे। अपना गला छुड़ाने के लिए वह सोचता है कि गालियाँ सुनने से अच्छा तो जाड़ा सहना है। सहना द्वारा रुपये माँगने पर उत्पन्न परिस्थिति में हल्कू निश्चय नहीं कर पा रहा था कि वह सहना को गाली और धौंस सहे या सिर पर सवार जाड़े में कम्बल की आवश्यकता को अनदेखा कर दे। उसने मजूरी से एक-एक पैसा काट-छपटकर तीन रुपये कम्बल के लिए जमा किए थे। आज निकले जा रहे थे। एक-एक पग के साथ उसका मस्तक दीनता के बोझ से दबा जा रहा था। इसलिए हल्कू ने रुपये लिए और इस तरह बाहर चला मानो अपना हृदय निकालकर देने जा रहा है।
 (ग) अंधकार के उस अनन्त सागर में यह प्रकाश एक नौका के समान हिलता, मचलता हुआ जान पड़ता था। उत्तर- प्रस्तुत पौंकायों कथा सम्राट प्रेमचंद रचित 'पूस की रात' कहानी ग्रामीण अंचल की एक यथार्थवादी कहानी से ली गई हैं। इन पंक्तियों में प्रेमचन्द ने एक गरीब किसान की व्यथा-कथा के माध्यम से भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था पर गहरा प्रहार किया है। प्रस्तुत पंक्तियों में ग्रामीण-परिवेश का पूरा सामाजिक, आर्थिक तथा पारिवारिक परिदृश्य हमारे सामने जीवंत हो गया है । हल्कू दीन-हीन किसान है जो पूस की ठिठुरती रात में फसल की रक्षा के लिए अपने वफादार कुत्ते जबरा के साथ खेत पर जाता है। वह ऊख के पत्तों की एक छतरी के नीचे एक पुरानी चादर ओढ़कर सोने का प्रयास करता है, लेकिन कड़ाके की ठंढ के कारण उसे नींद नहीं आती। शरीर में गर्मी लाने के लिए आठ-आठ चिलम पी जाता है, परन्तु इस बर्फीली रात में उससे उसे चैन नहीं मिलता। जाड़ा-पिशाच से बचने के लिए वह जबरा को गोद में लेकर सो जाता है ताकि उसके शरीर-स्पर्श से कुछ उसे उष्णता मिले। शीतलहरी की मार से परेशान हल्कू पत्तों को बटोरकर अलाव जलाकर तापता है। अलाव की लौ ऊपरवाले वृक्ष की पत्तियों को छू छूकर भागने लगता है। उस स्थिर प्रकाश में बगीचे के विशाल वृक्ष ऐसे मालूम होते थे, मानों जिस प्रकार सागर के असीम अनंत क्षेत्र में नौका एक सांकेतिक चिन्ह बनकर रह जाता है ठीक उसी प्रकार बगीचे में अलाव से उत्पन्न प्रकाश सागर में हिलते-डोलते नौका के समान ही ए. प्रतीक बन कर रह जाता है। अलाव का प्रकाश अंधकार रूपी दानव को भगाने में पूर्णतः असमर्थ रहता है।
 (घ) तकदीर की खूबी है । मजूरी हम करें, मजा दूसरे लूटें ।
 उत्तर- प्रस्तुत पंक्ति आदर्शोन्मुखी, यथार्थवादी, ग्रामीण भारत के अद्भुत चितेरे, सुविख्यात कथाकार प्रेमचंद रचित उत्कृष्ट संवाद योजना से परिपूर्ण चर्चित कहानी 'पूस की रात' से उद्धत है । इस पंक्ति में कथाकार ने हल्कू के कथन के माध्यम से गरीबों की तरसपूर्ण मानसिकता, बेबसी, शोषण, उत्पीड़न तथा गरीबी के साये में घुट-घुटकर जी रहे एक गरीब किसान के जीवन की व्यथा-कथा का सजीव अंकन किया है। यह कहानी गुलाम भारत के ग्रामीण किसानों के दुःख-दर्द का खुला दस्तावेज है। इस कहानी का नायक हल्कू कर्ज के बोझ से दबा हुआ है। पेट काटकर हल्कू ने तीन रुपये कम्बल के लिए जमा किए हैं ताकि जाड़े की ठिठुरती रात में वह उसे ओढ़कर खेत की फसल की रक्षा कर सके, लेकिन दुर्भाग्य उसका कि सहना की गाली और धौंस से बचने के लिए वह कर्ज के बाकी तीन रुपये उसे लौटा देता है। अपने खून-पसीने की कमाई महाजन को देकर वह पूस की रात में ठंडी हवा का कष्ट कम्बल के अभाव में झेलने को अभिशप्त है। इस पर उसके मन में यह व्यंग उभरा देखो यह है खेती का मजा ! हम तो जाड़े की रातों में ठिठुरें और उधर, दुनियाँ में ऐसे-ऐसे भाग्यवान सेठ पड़े हैं कि जाड़ा उनके पास तक नहीं फटकता । उनके पास गद्दे, रजाई, कंबल आदि कितने ही सामान हैं। उन्हें देखकर जाड़े को भी गरमी लगने लगती है। उनके रहते हुए जाड़े की क्या हिम्मत कि उसका गुजारा हो जाए। यह भी सब किस्मत का खेल है। मजदूरी हम करते हैं और उसका मजा सेठ साहूकार तथा महाजन लुटते होता है । के हल्क के इस कथन में भारत के किसानों की गरीबी का मार्मिक वर्णन दृष्टिगोचर होता है। वे जीवन भर मजदूरी करते हैं, किन्तु उसका लाभ महाजन या जमींदार उठाते हैं। 
प्रश्न 15. "कर्तव्य उसके हृदय में अरमान की भांति उछल रहा था।" इस कथन के आलोक में कहानी में जबरा की भूमिका का मूल्यांकन करें। 
उत्तर- प्रेमचन्द रचित 'पूस की रात' शीर्षक कहानी ग्रामीण अंचल की एक यथार्थवादी कहानी है। कहानी की कथा वस्तु सरल, सीधी और सपाट है। कथानक के विकास की गतिशीलता में विशेष उतार-चढ़ाव न होकर सर्वत्र एकरूपता की झलक मिलती है। यह कहानी ग्रामीण जीवन के परिवेश को बिल्कुल स्वाभाविक रूप से प्रस्तुत करता है जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। यह कथानक काल्पनिक तथा अस्वाभाविक न होकर बिल्कुल स्वाभाविक तथा यथार्थवादी है जिसमें कहीं भी आदर्शता का रंग नहीं चढ़ाया गया है। आलोच्य कहानी की पात्र या चरित्र योजना भी सार्थक और स्वाभाविक है। कहानी का एक पात्र जबरा कुत्ता है, जो पशु होकर भी अपनी मानव-तुल्य भूमिका से हमें अभिभूत कर देता है। जबरा एक स्वामिभक्त और वफादार कुत्ता के रूप में कहानी को जीवंत बना दिया है। कहानी में जबरा और हल्कू की उत्कृष्ट संवाद योजना सफल, सार्थक, सटीक और मुख्य भावाभिव्यंजक विशेषताओं से परिपूर्ण है। कहानी का नायक हल्कू अपने वफादार कुत्ता जबरा के साथ खेत में फसल की रक्षा के लिए तैनात है। हल्कू अपने खेत के किनारे ऊख के पत्तों की एक छतरी के नीचे चादर ओढ़े ठंढ से काँप रहा था। खाट के नीचे उसका संगी कुत्ता जबरा पेट में मुँह डाले सर्दी से कूं-कूं कर रहा था। सहसा जबरा ने किसी जानवर की आहट पाई। हल्कू की अनोखी मित्रता और विशेष आत्मीयता की स्फूर्ति से लबालव होकर वह ठंढे झोकों की परवाह न कर छतरी के बाहर आकर भूँकने लगता है। हल्कू के बुलाने पर भी वह हार के चारों ओर दौड़-दौड़ कर भूँकता रहता है। खेत की रक्षा करना उसका कर्तव्य है और वह उस दायित्व को पूरा करने के लिए एक क्षण अगर हल्कू के पास आ भी जाता तो तुरन्त बाहर की ओर दौड़ता । कर्तव्य उसके हृदय में अरमान की भाँति उछल रहा था। हल्कू ठंढ के मारे जहाँ अकर्मण्यता की रस्सियों से जकड़ा है वहीं जबरा ठंढ की परवाह न कर नीलगायों को खेत से भगाने के लिए भूँकता रहता है। जबरा अपने कर्तव्य पथ पर अविचल रहकर शहीद हो जाता है। जबरा की उपस्थिति ने कहानी को यथार्थ और जीवंत बना दिया है। 
प्रश्न 16. 'दोनों खेत की दशा देख रहे थे। मुन्नी के मुख पर उदासी छायी हुई थी। पर हल्कू प्रसन्न था।' ऐसा क्यों? मुन्नी की उदासी और हल्कू की प्रसन्नता का क्या कारण है ? 
उत्तर- 'पूस की रात' आदर्शोन्मुखी यथार्थवादी कथा सम्राट प्रेमचन्द की चर्चित आलोच्य कहानी है। इस कहानी में कहानीकार ने ग्रामीण जीवन के शोषण, उत्पीड़न तथा एक गरीब किसान का सजीव अंकन किया है। कथा का नायक अपने फसल की रखवाली करने खेत पर जाता है। पूस की ठंढ़ी रात में वह अलाव सेका और चादर ओढ़कर लेट गया। इधर नीलगायें उसके खेत में घुस गईं। फिर भी उसका मन खेत में जाने को नहीं हुआ। हल्कू गरम राख के पास आराम से बैठा था, मानो उसे फसल से कोई मोह न हो। वह उसकी सुरक्षा से पीछा छुड़ाना चाहता हो। निकम्मेपन की रस्सियों ने उसे चारों ओर से घेर लिया था। उधर नीलगायें उसके खेत का सफाया कर दीं। सुबह मुन्नी खेत पर आकर उसे जगाती हुई कहती है-क्या आज सोते ही रहोगे ? तुम यहाँ आकर रम गए और उधर सारा खेत चौपट हो गया। दोनों खेत की डाँड़ पर आए। दोनों ने खेत की दशा देखी। मुन्नी के मुख पर उदासी छा जाती है कि अब मजूरी करके मालगुजारी भरनी पड़ेगी। परन्तु हल्कू प्रसन्न था क्योंकि अब उसे भीषण ठंढी रात में खेती की रखवाली नहीं करनी पड़ेगी। 

भाषा की बात 

प्रश्न 1. वाक्य प्रयोग द्वारा इन मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करें- 
गला छूटना, बला टालना, ठंडा हो जाना, आँख तरेरना, बाज आना, भौहें ढीली पड़ना, आहट मिलना । 
उत्तर- 
गला छूटना -उस कंजूस की दोस्ती टूट ही जाती तो गला छूटता ।
 बला टालना-तुमसे दोस्तो क्या टूटी, मेरी तो बला ही टल गई।
 ठंढा हो जाना-पुलिस की गोली लगते ही चोर ठंढा हो गया। 
आँख तरेरना-रामू अपने नौकर पर सदा आँख तरेरता ही रहता है।
 बाज आना-हम जान पर खेलकर भी अपने देश की रक्षा करने से बाज नहीं आएँगे । 
भौहें ढीली पड़ना-पुत्र से सच्चाई जानने के पश्चात् पिता का भौंहें ढीली पड़ गई।
 आहट मिलना- शेयर बाजार का भाव गिरने वाला है, इसका आहट मुझे पहले ही मिल गया था।

प्रश्न 2. 'गला छूटना', 'आँख तरेरना' की तरह शरीर के अन्य अंगों की सहायता से दस मुहावरों को अर्थ सहित लिखें और उनका वाक्यों में प्रयोग करें ।

 उत्तर- (i) नाक कट जाना (प्रतिष्ठा नष्ट होना)-पुत्र के कुकर्म से पिता की नाक कट गई। 
(ii) कान लगाना ( ध्यान देना)-उसकी बातें कान लगाने योग्य हैं। 
(iii) आँखें मूँदना (मर जाना) - आज सबेरे उसकी माता ने आँखें मूंद ली । 
(iv) मुँह छिपाना (लज्जित होना) - वह मुझसे मुँह छिपाए बैठा है. 
 (v) आँख मारना (इशारा करना) - उसने आँख मारकर मुझे बुलाया। 
(vi) नाक पर गुस्सा ( तुरन्त क्रोध ) - गुस्सा तो उसकी नाक पर रहता है।
 (vii) सिर उठाना (विरोध में खड़ा होना) - देखता हूँ, मेरे सामने कौन आँख उठाता है।
 (viii) दाँत दिखाना (खीस काढ़ना)-खुद ही देर की और अब दाँत दिखाते हो। 
(ix) गर्दन काटना (जान से मारना) वह तो उनकी गर्दन काट डालेगा।
 (x) मुँह पकड़ना (बोलने से रोकना) - लोकतंत्र में कोई किसी का मुँह नहीं पकड़ सकता । 

प्रश्न 3. 'उठ बैठा' संयुक्त क्रिया का उदाहरण है। ऐसे पाँच अन्य उदाहरण दें। उत्तर- रो चुकना, पहुँच जाना, रो चुका, मार देना, बुला

 प्रश्न 4. निम्नलिखित विशेषणों से भाव संज्ञा बनाएँ- ढीली, दीर्घ, ठंडी, विशेष, गर्म, प्रसन्न । लेना उत्तर- ढीली गर्म ढीलाई गर्माहट दीर्घ - दीर्घता ठंडी विशेष विशेषता प्रसन्न प्रसन्नता । 

प्रश्न 5. “पेट में ऐसा दर्द हुआ कि मैं ही जानता हूँ"-यहाँ 'मैं ही जानता हूँ' संज्ञा उपवाक्य है। 'मैं नहीं जानता कि वह कहाँ है, में 'वह कहाँ है' संज्ञा उपवाक्य है। इसी तरह निम्नलिखित वाक्यों से संज्ञा उपवाक्य छोटे-
 (क) चिलम पीकर हल्कू लेटा और निश्चय करके लेटा कि चाहे जो कुछ भी हो अबकी सो जाऊँगा ।
 (ख) हल्कू को ऐसा मालूम हुआ कि जानवरों का एक झुंड उसके खेत में आया है।
 उत्तर- (क) चिलम पीकर हल्कू लेटा । 
(ख) हल्कू को ऐसा मालूम हुआ।

प्रश्न 6. निम्नलिखित वाक्यों में मिश्र और संयुक्त वाक्य चुनकर उन्हें सरल वाक्य में बदलें- 
(क) हल्कू ने आग जमीन पर रख दी और पत्तियाँ बटोरने लगा। 
(ख) राख के नीचे कुछ-कुछ आग बाँकी थी जो हवा का झोंका आ जाने पर जरा जाग उठती थी। 
(ग) पेट में ऐसा दर्द हुआ कि मैं ही जानता हूँ ।
 (घ) यह कहता हुआ वह उछला और अलाव के ऊपर से साफ निकल गया। 
(ङ) मैं मरते-मरते बचा, तुझे अपने खेत की पड़ी है। उत्तर-
 (क) हल्कू जमीन पर आग रखकर पत्तियाँ बटोरने लगा। 
(ख) राख के नीचे की आग हवा का झोंका आ जाने पर जाग उठती थी। 
(ग) पेट का दर्द मैं ही जानता हूँ। 
(घ) ऐसा कहता हुआ। वह अलाव के ऊपर से साफ निकल गया।
 (ङ) मेरे मरने की नहीं तुझे अपने खेत की पड़ी है। 

प्रश्न 7. हल्कू और लेखक की भाषा में फर्क है। आप बताएं कि यह फर्क क्यों है ? इसके कुछ उदाहरण पाठ से चुनकर लिखें। 
उत्तर- 'पूस की रात' शीर्षक कहानी में यह बात स्पष्ट रूप से दिखाई देती है कि हल्क और लेखक (प्रेमचंद) की भाषा में फर्क है। यह फर्क लेखक द्वारा कहानी की भाषा को पात्रोचित बनाने के प्रयास के कारण है। बहुधा लेखकगण कहानियों, उपन्यासों अथवा नाटकों में ऐसा प्रयास करते हैं। वे पात्रों के स्तर को ध्यान में रखकर उनके उपयुक्त भाषा प्रयोग करते हैं। प्रस्तुत कहानी के साथ भी यही बात है। इसके कुछेक उदाहरण इस प्रकार हैं- 
हल्कू : अब तो नहीं रहा जाता जबरू! चलो, बगीचे में पत्तियाँ बटोरकर तापें। टाँठे हो जाएँगे तो फिर सोएँगे ।

 लेखक : बगीचे में घुप अँधेरा हुआ था और अंधकार में निर्दय पवन पत्तियों को कुचलता हुआ चला जाता था ।

 लेखक : जाड़ा किसी पिशाच की भाँति उसकी छाती को दबाए हुए था।

 प्रश्न 8. वाक्य प्रयोग द्वारा लिंग-निर्णय कीजिए- ढेर, अलाव, लौ, दोहर, जी, गर्व, ठंढ, पूंछ, चादर, राख, शीत, झुंड, सत्यानाश। 
उत्तर-
ढेर (पूँ० )- वहाँ पत्तियों का ढेर लगा हुआ था। 
अलाव (पुं०) -थोड़ी ही देर में अलाव जल उठेगा। 
दीपक की लौ मद्धिम है। 
 दोहर (स्त्री०) - उसने अपनी दोहर उतार कर डोर पर रख दी। 
जी (पुं०)-राम का जी कट गया। 
 गर्व (पुं०) - उसका गर्व एक दिन उसे ले डूबेगा ।
ठंड (स्वी० )- आज कड़ाके की ठंढ है। 
 पूँछ (स्त्री०) -गाय की पूँछ लम्बी होती है। 
चादर (स्वी०)- मेरी चादर छोटी है। 
'राख (स्त्री०) -चुल्हे की राख में गर्मी नहीं है। 
शीत (पुं०) -रात की शीत ने घुटने को जकड़ दिया। 
झुण्ड (पुं०)-वहाँ गाय का झुंड है। 
 सत्यानाश (पु०) -खेत का सत्यानाश हो गया और सोए हुए हो। 

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